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क्रेडिट रेटिंग Credit Rating

क्रेडिट रेटिंग का सामान्य अर्थ
क्रेडिट रेटिंग किसी भी देश संस्था या व्यक्ति आदि के कर्ज लेने या उसे चुकाने की क्षमता का मूल्यांकन होता है। क्रेडिट रेटिंग एजेंसीया परोक्ष रूप से यह बताती हैं कि देश संस्था या व्यक्ति आर्थिक रूप से कितना मजबूत है । उसको कर्ज देना जोखिम से भरा है या नहीं अर्थात वह कर्ज चुकाने की क्षमता रखता है या नहीं।

 क्रेडिट रेटिंग का महत्व

A लोन देने वाले बैंक के लिए

 1 बेहतर निवेश का फैसला 

कोई भी बैंक या उधार देने वाली कंपनियां किसी जोखिम भरे ग्राहक को पैसा नहीं देना चाहती हैं ।क्रेडिट रेटिंग कंपनी को उधार देने वाला व्यक्ति या कंपनी की क्रेडिट योग्यता और जोखिम के बारे में पता चलता है।

 2 लोन राशि की सुरक्षा

 ज्यादा क्रेडिट रेटिंग लोन राशि की सुरक्षा का आश्वासन देता है क्योंकि उसका लोन समय पर ब्याज के साथ वापस हो जाएगा 

B उधार कर्ताओं के लिए 

1 लोन की मंजूरी
 
ज्यादा क्रेडिट रेटिंग मिलने पर उधार लेने वाले ग्राहक को बिना जोखिम वाले ग्राहक के रूप में देखा जाता है और बैंक उसे आसानी से ऋण उपलब्ध करा देते हैं।

 2 कम ब्याज दर 

बैंक विभिन्न प्रकार के ग्राहकों के लिए विभिन्न श्रेणियों के ब्याज दर निर्धारित करते हैं जिन ग्राहकों की क्रेडिट रेटिंग ज्यादा होती है उन्हें विशेष ब्याज दर पर लोन दिए जाते हैं जोकि कम होते हैं।

क्रेडिट रेटिंग की प्रवृत्ति

1सूचनाओं पर आधारित

 क्रेडिट रेटिंग सूचनाओं पर आधारित होता है जिसमें विभिन्न कंपनियों द्वारा साझा की गई सूचनाओं की गोपनीयता के साथ कंपनियों से उसके संबंधों पर उसके साथ मूल्यांकन की क्षमता निर्भर करती है इसलिए क्रेडिट रेटिंग के समय यह एजेंसियां सूचनाओं की गोपनीयता पर विशेष ध्यान देती हैं ।

2एक से ज्यादा एजेंसियों द्वारा क्रेडिट रेटिंग 

सामान्यतः पूर्ण विकसित पूंजी बाजार में एक ही क्रेडिट एजेंसी द्वारा साख मूल्यांकन का कार्य किया जाता है एक से अधिक एजेंसियों के मौजूद रहने पर क्रेडिट रेटिंग में विभिन्नता आ जाती है और कर्ज के मुद्दे पर अलग-अलग रेटिंग निर्धारित की जा सकती है ।
3 पहले से रेटेड संस्थाओं के मामले की निगरानी

 कई ऐसे कारक हैं जो ऋण जारी करने वाली संस्थाओं को प्रभावित कर सकते हैं इसलिए यह आवश्यक हो जाता है कि क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों द्वारा उन पर निगरानी रखा जाए और रेटिंग का अपडेट जारीकर्ता के साथ संपर्क कर परस्पर क्रिया करने के बाद करना चाहिए।
 
4 क्रेडिट रेटिंग का प्रकाशन 

भारत में केवल जारीकर्ता के प्रार्थना पर ही क्रेडिट रेटिंग का प्रकाशन किया जाता है ।

5 क्रेडिट रेटिंग के विरुद्ध अपील करने का अधिकार

 यदि जारीकर्ता क्रेडिट रेटिंग से असंतुष्ट है तो वह मूल्यांकन एजेंसियों से अतिरिक्त सूचनाओं द्वारा समीक्षा करने के लिए कह सकता है । एजेंसियां एक समीक्षा करती हैं और तब अंतिम निर्णय पर पहुंचती है।
 
6 क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों की रेटिंग 

इन एजेंसियों की रैंकिंग इनके सेवा की गुणवत्ता स्थिरता और एकता द्वारा की जाती है।

 7 ऋण पत्रों के लिए साख मूल्यांकन

 क्रेडिट रेटिंग एक विशेष ऋण पत्र के लिए जारी की जाती है जारीकर्ता के लिए नहीं । यह संभव है कि दो ऋण पत्रों को सामान कंपनियों द्वारा जारी किया गया हो और उनकी रेटिंग में परिपक्वता अवधि में भिन्नता के कारण अंतर आ जाए।

 8 उधार बनाम वित्तीय विश्लेषण 

क्रेडिट रेटिंग वित्तीय विश्लेषण की अपेक्षा कहीं ज्यादा व्यापक है। क्रेडिट रेटिंग जारीकर्ता के कहने पर और उसके सहयोग से किया जाता है । इसके विश्लेषण और प्रकाशन के लिए कहीं ज्यादा योग्य और अनुभवी व्यक्तियों की आवश्यकता होती है।

क्रेडिट रेटिंग  लाभ

A निवेशकों की दृष्टि से 

1निवेशकों की सुरक्षा

क्रेडिट रेटिंग निवेशकों को जारीकर्ता कंपनियों के मजबूती के बारे में पहले ही सूचना देती है । क्रेडिट रेटिंग द्वारा निवेशक अपने निवेश को उच्च क्रेडिट रेटिंग वाले सुरक्षित और कम जोखिम वाले प्रतिभूतियों में अपने पैसे निवेश करने के लिए सुझाव देता है।

2 निवेशकों को निर्णय लेने की आजादी 
 
निवेशक क्रेडिट रेटिंग द्वारा जुड़े संकेतों पर अपने निर्णय लेते हैं । इसके लिए किसी व्यापारिक बैंक स्टॉक दलाल या पोर्टफोलियो मैनेजर ओं की सलाह की आवश्यकता नहीं होती ।

3 निवेश प्रस्तावों को समझने के लिए क्रेडिट रेटिंग से प्राप्त सूचनाओं पर निवेशकों का भरोसा होता है इसलिए वह क्रेडिट रेटिंग प्रतिभूतियों में आसानी से निवेश करती हैं।
 4 कंपनियों में निवेश से पहले उसके बारे में जानकारी लेने में व्यर्थ किए गए समय की बर्बादी से निवेशकों को मुक्ति मिलती है और वह निवेश के लिए जल्दी निर्णय लेते हैं।

 5 मध्यस्थों को उच्च क्रेडिट रेटिंग के पत्रों में निवेश करने के लिए अपने ग्राहकों को संतुष्ट करने का कम प्रयास करना पड़ता है।

B कंपनी के दृष्टि से लाभ

 1 कंपनी को बाजार द्वारा पूंजी प्राप्त करने में सुविधा होती है क्योंकि उच्च वर्ग की क्रेडिट रेटिंग निवेशक ओं में विश्वास पैदा करते हैं ।

2 निवेशक कभी भी सुरक्षित निवेश कम जोखिम और आसान उधार की रिटर्न को सुनिश्चित करता है इसलिए कंपनी उच्च क्रेडिट रेटिंग के ऋण पत्रों या बांड पर कम ब्याज लगाकर उधार की लागत को कम कर सकता है ।

3 एक कंपनी उच्च दर्जा बंदी यानी क्रेडिट रेटिंग द्वारा फंड को आसानी से पैदा कर लेती है इसके लिए उसे विज्ञापन और प्रेस पर कम खर्च करना पड़ता है ।

4 साख मूल्यांकन कंपनी की छवि को ग्राहकों  अंशधारकों निवेशक और लेनदार हूं की नजर मैं वृद्धि करता है निवेशक हूं को निवेश सुरक्षित महसूस होते हैं ।

5 क्रेडिट रेटिंग प्रदाताओं को उनके कार्यों के विस्तार के लिए प्रोत्साहित करती है या उनकी उत्पादन गतिविधियों में विविधता लाती है जिसका संबंध भविष्य में कंपनी की प्रगति से होता है।

क्रेडिट रेटिंग की हानियां

1 क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों द्वारा विभिन्न कंपनियों के बहुत सारी सूचनाओं को प्रकट नहीं किया जाता है जो निवेश निर्णय को प्रभावित करती हैं क्योंकि महत्वपूर्ण सूचनाओं की कमी के कारण निवेशकों को नुकसान उठाना पड़ता है।

 2 एक विशेष समय बिंदु पर कंपनियों का अध्ययन क्रेडिट एजेंसियों के द्वारा किया जाता है । इसमें आर्थिक राजनीतिक पर्यावरण और सरकार द्वारा लिए जाने वाले निर्णयों का अध्ययन किया जाता है। इनमें किसी भी प्रकार का परिवर्तन क्रेडिट रेटिंग के संकेतों में बदलाव नहीं कर सकता है फलतःनिवेशकों का जोखिम बढ़ जाता है।

3 क्रेडिट रेटिंग क्षमता किसी भी कंपनी के सुदृढ़ता का प्रमाण पत्र नहीं है यह एक विचार है।
 
4 क्रेडिट रेटिंग का कार्य प्रतिकूल समय में किए जाने पर रेटिंग कंपनी की कम हो जाती है जो निवेशकों को भ्रामक निष्कर्ष पर ले जाते हैं जो कंपनी के हित में नहीं होता ।

5 कुछ पत्रों की रेटिंग विभिन्न क्रेडिट एजेंसियों द्वारा अलग-अलग तरीके से की जाती है जिससे रेटिंग में अंतर होता है और कंपनी में निवेश पर प्रभाव पड़ता है।

Comments

  1. This comment has been removed by a blog administrator.

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  2. धन्यवाद और बेहतर बनाने के सुझाव दें

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