: विक्रय प्रक्रिया विपणन के अंतर्गत जो सम्मिलित क्रियाएं होती हैं इसका एक भाग है जो व्यवसाय में निरंतर चलता रहता है। इसमें संभावित ग्राहकों की पहचान से लेकर के ग्राहकों की संतुष्टि तक के समस्त कार्य को सम्मिलित किया जाता है। विक्रय प्रक्रिया के निम्न चरण हैं 1 पूर्वेक्षण करना 2 पूर्व पहुंच 3 रीच एवं प्रस्तुतिकरण 4अभिनय 5 समाप्ति समाप्ति 6 व्यसनों का उपचार 7 समाप्ति या समाप्ति और 8 अनुगमन 1 पूर्वेक्षण करना अव्यवस्थित प्रक्रिया की यह सबसे पहली अवस्था है। इसमें यह दर्शाया गया है कि उस वस्तु की आवश्यकता वाले शब्द और संकेत हैं। इसका कारण यह है कि बिना आवश्यकता वाले या अयोग्य लोगों की ओर से अधिक प्रयास करने से बिक्री में वृद्धि नहीं होती है, विक्रेता का समय और परिश्रम कम हो जाता है और कोई आर्थिक लाभ भी नहीं होता है। 2 पूर्व पहुंच जब वैराइटी को भावी वियेंटल का पता लगता है तो वैराइटी क्रिया की दूसरी अवस्था पूर्व पहुंच की आ जाती है। इससे क्रेता के संबंध में सामान्यता उसकी आयु, आयु, परिवार, मैत्री संबंध, रुचि में सभी की मित्रता का संबंध होता ह...
उद्यमिता की परिभाषा उद्यमिता से आशय उद्यमी द्वारा किए जाने वाले कार्यों से है जिसमें उद्यमी किसी नए व्यवसाय को स्थापित करने से संबंधित विभिन्न कार्यों को करता है. उद्यमी उद्यमी से ऐसे ऐसे व्यक्ति से है जो जोखिम को उठाता है संसाधनों की व्यवस्था करता है और व्यवसाय के प्रति कौशल दृष्टिकोण रखने वाला होता है. संसाधन मानवीय आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए जिन वस्तुओं पर लंबी अवधि तक निर्भर रहा जाता है संसाधन कहलाते हैं. उद्यमी द्वारा प्रयुक्त संसाधन पूंजी ,भूमि ,श्रम ,कच्चा माल, संगठन उद्यमिता की आवश्यकता एवं महत्व 1 नवाचारों को प्रोत्साहन देने में - यहां नवाचार का मतलब है उत्पादन की नई विधि नई मशीन नई वस्तुओं को नई टेक्नोलॉजी द्वारा उत्पादन करना है . 2 व्यावसायिक इकाइयों की स्थापना में- व्यवसायिक इकाइयों की स्थापना के लिए उद्यमिता की महत्वपूर्ण भूमिका होती है जिसके अंतर्गत आधुनिक मशीनें प्रशिक्षित उद्यमी द्वारा सफलतापूर्वक लगाई जाती हैं और उद्योग स्थापित किया जाता है. 3 आर्थिक विकास को तेज करने में- उद्यमिता द्वारा औद्योगिकरण की प्रक्रिया तेज होती है जिससे आर...