औद्योगिक इकाइयों का स्थानीयकरण

औद्योगिक इकाइयों के स्थानीयकरण का अर्थ 
एक उद्यम के स्थानीयकरण से आशय औद्योगिक इकाइयों के किसी विशेष स्थान अथवा क्षेत्र की ओर आकर्षित एवं केंद्रित होने से है। यह वह स्थान या क्षेत्र है जहां पर औद्योगिक उत्पादन के विभिन्न साधन सुलभता से उपलब्ध होते हैं। उदाहरण के लिए भारत का सूती वस्त्र उद्योग मुंबई और अहमदाबाद में ही केंद्रित है क्योंकि वहां पर अन्य क्षेत्रों की अपेक्षा सूती वस्त्र उत्पादन के विभिन्न साधन प्रचुर मात्रा में उपलब्ध होते हैं।
एक उद्यम के स्थानीयकरण की परिभाषा

प्रोफ़ेसर डी एच रॉबर्टसन के अनुसार
"विशेष क्षेत्र के उद्योगों के आकर्षित होने केंद्रित होने तथा पनपने की प्रवृत्ति को ही एक उद्यम का स्थानीयकरण करते हैं ।" 

डॉक्टर पीएस लोकनाथन के अनुसार 
"एक उद्यम के स्थानीयकरण से अभिप्राय विभिन्न क्षेत्रों में उद्योगों के केंद्रीय करण से है जो अंतरराष्ट्रीय पहलू से क्षेत्रीय श्रम विभाजन का लाता है।"
 प्रोफेसर सुबीन के अनुसार " आदर्श उद्यम का स्थानीयकरण वही है जो वस्तु या सेवा के उत्पादन एवं वितरण की न्यूनतम प्रतीक आई लागत को संभव बनाता है" 

एस्प्रिनगरल एवं लेंस वर्ग के अनुसार "एक उद्यम का स्थानीयकरण प्राय: विरोधी सामाजिक ,आर्थिक, सरकारी एवं भौगोलिक कारणों के बीच तालमेल का परिणाम है।

 निष्कर्ष 

किसी क्षेत्र अथवा स्थान विशेष पर उद्योगों के आकर्षित होने ,केंद्रित होने एवं बढ़ते जाने की प्रवृत्ति को एक उद्यम का स्थानीयकरण कहते हैं।
एक उद्योग को प्रभावित करने वाले दो घटक प्राथमिक घटक और गौंण घटक होते हैं ।

प्राथमिक घटक 

इसमें उद्योगों के प्रादेशिक अथवा क्षेत्रीय वितरण प्रभाव डालते हैं इन्हें प्रादेशिक कारण भी कहा जाता है। इसमें कच्चे माल की आपूर्ति ,बाजारों से उद्योग की निकटता, श्रम की उपलब्धता, शक्ति स्रोतों की उपलब्धता यातायात और संदेश वाहन के साधनों की निकटता, वित्त की उपलब्धता आते हैं।

गौण कारण या घटक 

यह वे घटक होते हैं जो कि उद्योगों के पुन: वितरण पर केंद्रीकरण एवं विकेंद्रीकरण कृतियों द्वारा प्रभाव डालते हैं। इसके अंतर्गत राजकीय नियम, प्राकृतिक साधन और जलवायु संबंधी सुविधाएं ,प्रतियोगी उद्योग, पूरक उद्योग और व्यक्तिगत घटक शामिल होते हैं। यहां पूरक उद्योग का अर्थ है ऐसे उद्योग जिन पर मुख्य उद्योग अपने सामग्री के लिए निर्भर करता है।

उद्योग के स्थानीयकरण के महत्त्व या लाभ 

1 पूंजी विनियोग में कमी 
उद्योग का स्थान निर्धारण पूंजी  के विनियोग में पर्याप्त कमी करता है क्योंकि कच्चे माल की आपूर्ति और ईंधन की आपूर्ति कम लागत पर ही उस स्थान पर प्राप्त हो जाती है.
 
2 साधनों का अनुकूलतम उपयोग 
आदर्श स्थान निर्धारित होने पर साधनों का अनुकूलतम उपयोग संभव हो जाता है.

3 संचालन व्यय में कमी 
उद्योग की स्थापना से कच्चा माल, परिवहन, श्रम ,इंधन उपकरण, मरम्मत ,सामग्री आदि की सुविधा समीप ही उपलब्ध हो जाती है. परिणास्वरूप संचालन व्यय में कमी आती है.
 
4 लाभ में वृद्धि 
सभी प्रकार की लागतो में कमी और कुशल उत्पादन के कारण प्रति इकाई लागत में कमी आती है जिससे लाभ की मात्रा में वृद्धि होने की संभावना रहती है.
 
5श्रम की उपलब्धता 
एक उद्योग के स्थानीयकरण में कुशल श्रम की उपलब्धता का महत्वपूर्ण स्थान होता है दूर-दूर के श्रमिक ऐसे स्थानों पर आकर्षित होते हैं ।

6 अनुसंधान सुविधाओं का विकास 
कोई उद्योग जब एक ही स्थान पर स्थापित होते हैं तो यह मिलकर संयुक्त रूप से अनुसंधानसाला की स्थापना कर लेते हैं जहां औद्योगिक अनुसंधान में कमी हो जाती है।
 
7 संतुलित क्षेत्रीय विकास 
औद्योगिक स्थान सरकारी नीतियों के अनुरूप होने पर देश में संतुलिविकास को बल मिलता है और पिछड़े क्षेत्रों में विकास होता है । उद्योग के एक ही स्थान पर स्थापित हो जाने से उस स्थान की ख्याति बढ़ जाती है ।उद्योग के नाम से माल का विक्रय होने लगता है ।जैसे अलीगढ़ के ताले,आगरा के चमड़े के जूते इत्यादि 

8 सुरक्षा में वृद्धि 
आदर्श स्थान होने पर वहां बाढ़ ,अग्नि, विदेशी ,आक्रमण चोरी, डकैती आदि से सुरक्षा की पर्याप्त व्यवस्था की जाती है। यहां बीमा कंपनियां भी उन्हें बीमा की सुरक्षा प्रदान करती है।

Approaches of selling process

 विक्रय प्रक्रिया के अंतर्गत विक्रय कर्ता द्वारा अपने ग्राहकों के लिए विभिन्न प्रकार के विक्रय दृष्टिकोण को अपनाना पड़ता है क्योंकि ग्राहकों की मनोंृतया ,स्वभाव, आय, रहन सहन सभी चीजों को विक्रय कर्ता  द्वारा ध्यान में रखना आवश्यक होता है। इनको देखते हुए हम पांच प्रकार के विक्रय दृष्टिकोण को अपना सकते हैं ।

1 मित्र दृष्टिकोण 

इस दृष्टिकोण के अंतर्गत संगठनात्मक संरचना में विपणन गतिविधियो में सहायता करने के लिए कम से कम 2 लोगों को एक साथ रखा जाता है जिनमें मैत्रीपूर्ण संबंध होते हैं और यह विपणन के काम को आसान बना देते हैं।

 इसमें यह धारणा भी शामिल होती है कि कोई भी व्यक्ति अपने करीबी दोस्त के साथ ही व्यापारिक संबंध बनाना चाहता है जिसके बारे में वह व्यक्तिगत रूप से जानता है । संबंधों में किसी प्रकार का दिखावा हो तो यह विपणन कार्य में बाधक होता है । एक और चीज स्पष्ट करना अनिवार्य है कि विपणन कर्ता यदि व्यक्तिगत रूप से ग्राहकों के साथ संपर्क करता है तो उसमें मैत्रीपूर्ण आत्मीयता की भावना का होना अनिवार्य है ।

2 समाधान दृष्टिकोण 

इसके अंतर्गत विक्रय करता को ध्यान से ग्राहकों को सुनना होता है उससे कुछ प्रश्नों के द्वारा उसकी आवश्यकता ओं को जानने का प्रयास किया जाता है और फिर ग्राहक को वस्तु क्रय करने के लिए सलाह दिया जाता है ।

यदि मुझे भारतीय अर्थव्यवस्था के पुस्तक की आवश्यकता है और किताब विक्रेता द्वारा पुस्तक के लेखक के नाम और प्रकाशन के बारे में पूछे जाने पर मैं नहीं बता पाता तो पुस्तक विक्रेता द्वारा यह पूछना कि किस उद्देश्य से आप पुस्तक खरीदना चाहते हैं ,मैं उसे बताता हूं । वह मुझे सिविल सर्विसेस की किताब खरीदने की सलाह देता है।मेरे द्वारा वह पुस्तक खरीद ली जाती है उसे पढ़ने के साथ ही उस पुस्तक की भाषा और लेखन शैली मुझे काफी प्रभावित करती है इस प्रकार मेरे सामने जो पुस्तक ख़रीद को लेकर समस्याएं उत्पन्न हुई थी उसे विक्रय करता द्वारा काफी अच्छे तरीके से समाधान किया गया। 

3 गुरु दृष्टिकोण 

इसके अंतर्गत आप अपने को एक विश्लेषक और तार्किक व्यक्ति के रूप में लोगों के सामने प्रस्तुत कर सकते हैं जिसमें बौद्धिक क्षमता के द्वारा समस्याओं के समाधान करने और सलाहकार की भूमिका निभाने की क्षमता होती है । इस प्रकार के दृष्टिकोण रखने वाला सेल्सपर्सन एक मोटीवेटर के रूप में अपना काम करता है और बहुत सारे रेफरल बनाता है जो इसे फॉलो करते हैं । 

इसके अलावा एक सेल्सपर्सन अपने क्षेत्र का अच्छा जानकार होता है जिसे अपने क्षेत्र के विभिन्न चुनौतियां का सामना करने का अच्छा अनुभव होता है।

4 परामर्शदात्री बिक्री दृष्टिकोण

सामान्यतः तकनीकी से संबंधित विक्रय के लिए इसका विशेष महत्व होता है ।इसमें विक्रय कर्ता अपने ग्राहकों के साथ मित्रता और विश्वसनीयता के संबंध स्थापित करता है। अपनी समझ ज्ञान और अनुभव द्वारा वह ग्राहकों के समस्याओं का विश्लेषण कर उसे उचित परामर्श देता है। 

5 ग्राहक  व्यक्तित्व दृष्टिकोण 

इसके अंतर्गत एक विक्रय कर्ता खरीदार के प्रकार के अनुसार अपने विक्रय दृष्टिकोण को अपनाता है | पहले वह खरीदार को परखता है उसके बाद वह विक्रय के उस तरीके को अपनाता है जो उसे अधिक प्रभावित कर सकता है | 

मान लीजिए ए और बी दो मित्र हैं | ए पेशे से एक साइकल विक्रय कर्ता है जबकि बी एक शिक्षक है | ए द्वारा बी को साइकिल खरीदने की सलाह दी गई। ए ने साइकिल खरीदने के लिए बी पर जोर नहीं दिया और ना ही उससे सहमति लेने का भी प्रयास किया । ए ने तुरंत हां ना करके 4 दिन पश्चात साइकिल लेने की इच्छा जाहिर की । ए साइकिल का एक विक्रय कर्ता था इसीलिए उसने बी को साइकिल बेच दी।

 यहां यह ध्यान देने वाली बात है कि ए का बी के साथ घनिष्ठ संबंध था इसलिए वह एक पेशेवर के रूप में बी को साइकिल नहीं भेज सकता था ।

बी द्वारा इस बात की पुष्टि कर ली जाती है उन4 दिनों में कि ए द्वारा उसे उचित सलाह दिया गया है। इसलिए वह बी से ही साइकिल खरीदने की अपनी इच्छा जाहिर करता है। 

इस प्रकार उपरोक्त विक्रय दृष्टि को ध्यान में रखकर एक विक्रय कर्ता  विपणन में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

selling process विक्रय प्रक्रिया

: विक्रय प्रक्रिया विपणन के अंतर्गत जो सम्मिलित क्रियाएं होती हैं इसका एक भाग है जो व्यवसाय में निरंतर चलता रहता है। इसमें संभावित ग्राहकों की पहचान से लेकर के ग्राहकों की संतुष्टि तक के समस्त कार्य को सम्मिलित किया जाता है। विक्रय प्रक्रिया  के निम्न चरण हैं 
1 पूर्वेक्षण करना 
2 पूर्व पहुंच 
3 रीच एवं प्रस्तुतिकरण 
4अभिनय 
5 समाप्ति समाप्ति
6 व्यसनों का उपचार 
7 समाप्ति या समाप्ति और 
8 अनुगमन

1 पूर्वेक्षण करना
अव्यवस्थित प्रक्रिया की यह सबसे पहली अवस्था है। इसमें यह दर्शाया गया है कि उस वस्तु की आवश्यकता वाले शब्द और संकेत हैं। इसका कारण यह है कि बिना आवश्यकता वाले या अयोग्य लोगों की ओर से अधिक प्रयास करने से बिक्री में वृद्धि नहीं होती है, विक्रेता का समय और परिश्रम कम हो जाता है और कोई आर्थिक लाभ भी नहीं होता है।

2 पूर्व पहुंच
जब वैराइटी को भावी वियेंटल का पता लगता है तो वैराइटी क्रिया की दूसरी अवस्था पूर्व पहुंच की आ जाती है। इससे क्रेता के संबंध में सामान्यता उसकी आयु, आयु, परिवार, मैत्री संबंध, रुचि में सभी की मित्रता का संबंध होता है। ऐसे साक्षात्कार से बातचीत करने वाला व्यक्ति इन साड़ियों में समय का विशेष ध्यान रखता है। उदाहरण के लिए अगर ग्राहक ने लिखा है तो बिना पढ़े ग्राहक की तुलना में कुछ और प्रकार का होगा। इसी प्रकार यदि एक तकनीकी ज्ञान वाला ग्राहक होगा तो उसके साथ व्यावसायीकरणकर्ता का व्यवहार दूसरा होगा।

3 रीच एवं प्रस्तुतिकरण
क्रेटा का पता लगाएं और उसके बारे में जानकारी प्राप्त करें इस बात की आवश्यकता है कि उस तक पहुंच जाए और वस्तु को प्रस्तुत किया जाए क्रेता तक पहुंच के कई तरीकों से संदर्भ शामिल है पहुंच, परिचय पहुंच, वास्तु पहुंच और उपभोक्ता लाभ पहुंच। 
संदर्भ रीच के अंतर्गत उपयोगकर्ता पुराने ग्राहक का कोई यह पत्र नोट ग्रह का नाम से लिखा है और फिर से लेकर वह ग्राहक के पास जाता है तो ऐसी रीच प्रसंग रीच कहलाती है 
पूर्व परिचय रीच 
जब कोई पत्र नहीं होता है तो वह इस तरीके को अपनाता है। इसमें ग्राहक का रेटिंग कर अपना परिचय दिया गया है और बताया गया है कि उसका नाम क्या है, वह किस कंपनी में काम करता है और किस सामान के लिए वह उसके पास आया है।
वस्तु पहुंच 
इसमें ग्राहक के पास की वैरायटी अपनी वस्तु को सामने रख देती है जिससे ग्राहक को उसके वैयक्तिक पात्र की भावना समझ में आ जाती है। 
उपभोक्ता लाभ पहुंच 
यह विधि आम तौर पर सामानों पर आधारित होती है। वस्तु से उपभोक्ता को क्या लाभ होता है इसकी जानकारी विक्रेता द्वारा उपभोक्ता को दी जाती है और उसे इसमें अपनी ओर आकर्षित करने का प्रयास किया जाता है।

4
इसमें ग्राहक के संयोजन के रूप में एक नाटक का प्रदर्शन किया जाता है जिससे कि ग्राहक अपनी दृष्टि से प्रभावित हो और वस्तु को विखंडित करने के लिए लालायित हो जैसे कि जीवन बीमा का उद्देश्य जोखिम को सहन करना है जबकि बीमा धारक बीमाधारक ऐसा नहीं सोचता है। वह तो अपने आप को निश्चित काल तक जीवित रहने की बात करता है। वैसे ही समय बीमा कलाकार नाटक अपना खेलता है और अपने थैले में कुछ पत्रों के बारे में बताता है और बताता है कि नवयुवक की मृत्यु में मृत्यु किस प्रकार उसके परिवार को अंधेरे में डाल देती है यदि इस छात्र ने अपना जीवन बीमा करा लिया हो
तो परिवार वालों को इतना धन मिल जाता है कि वे अपने जीवन के रूप में काम कर सकते हैं।

5 समाप्ति समाप्ति
 जब विक्रेता ने अपनी बात का भुगतान कर दिया है और वस्तु का प्रदर्शन भी कर दिया है तो उसे अब इस बात का पता चल गया है कि ग्राहक ने वस्तु के बारे में निर्णय लिया है या नहीं। कुछ ग्राहक ऐसे होते हैं जिनका विषय-वस्तु में पता नहीं चलता क्योंकि वह उस वस्तु पर अपनी प्रतिक्रिया नहीं देते। ऐसी स्थिति में वैराइटी कलाकारों को ऐसे प्रश्न करने के लिए कहा जाता है, जिससे पता चलता है कि ग्राहक ने इसे तैयार किया है या नहीं। आपको कौन सा मॉडल पसंद है? आपको किस रंग को पसंद आएगा? आपके लिए किचन पैक कर दूं आदि।
6 व्यसनों का उपचार
 जब ग्राहक वस्तु को विक्रीटेड करने की स्थिति में नहीं होता या वस्तु पसंद नहीं आती तो वह विभिन्न प्रकार की व्यग्रताएं उठाता है। एक एवं अच्छे कुशल विचक्षण कलाकारों को क्रीड़ाओं से डरना नहीं चाहिए बल्कि अपने शिष्ट कला का प्रदर्शन करने वाले इन चरित्रों को दूर करने में ऐसा करना चाहिए जिससे कि ग्राहक नैतिक दृष्टि से दब जाए और क्रीड़ा करने का आदेश दे दे।

7 समाप्ति या समापन 
एक व्युत्पत्ति द्वारा ग्राहक का पता तब तक चलाया जाता है जब तक कि ग्राहक वस्तु को ग्राहकों की सुरक्षा के लिए पेश न कर दे।

8 अनुगमन
समाप्ति तिथि के अंत में इस बात की आवश्यकता होती है कि ग्राहक का अनुगमन किया जाए। अनुगमन में विभिन्न विशेषताएँ शामिल हैं जिनमें दो प्रमुख हैं एक ग्राहक को वस्तु उसके ऑर्डर के अनुसार मिल जाएगी और दो ग्राहक रहेंगे तो भविष्य में ऑर्डर मिलने की संभावना बनी रहेगी। समय-समय पर ऑनलाइन बिक्री नीति के तहत ऐसा किया जाता है कि ग्राहकों से दूसरे ग्राहकों की ओर से आकर्षित नहीं किया जाता है और गैर-लाभकारी ग्राहकों से ग्राहक हो जाते हैं।


विपणन से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्न

1 विपणन की अवधारणा है 
a उत्पादनमुखी  b विक्रयुनमुखी c ग्रहकोंमुखी 
d विक्रेतामुखी
Ans c
विपणन अवधारणा ग्राहक मुखी है

2 विपणन जीवन स्तर प्रदान करता है यह परिभाषा दी गई है 
a हेसन b पआॅलमजुर c विलियम जे स्टांटन 
d कोटलर
Ans c
Paul Mazor ने अपनी परिभाषा में कहा है कि विपणन जीवन स्तर प्रदान करता है।यह व्यक्ति के जीवन स्तर में सुधार लाता है जो पहले की स्थिति से और बेहतर वस्तु या सेवा के उपयोग से संभव है।

3 फर्म अधिक निराशाजनक स्थिति में बाजार में अपना हिस्सा बेचने के लिए साधनों तथा तरीकों को अपनाती है 
a उत्पाद जीवन चक्र का विकास स्तर
b उत्पाद जीवन चक्र का घटता स्तर
c परिपक्वता का स्तर
d सभी
Ans b
परिपक्वता बिंदु के बाद फार्म उत्पाद की मांग में बढ़ोतरी नहीं होती है और बाजार हिस्सेदारी कम होने लगती है।

4 विपणन एक प्रक्रिया है जो उत्पादन के....... प्रारंभ होती है
a पूर्ण b तत्काल पश्चात c साथ साथ d बाद में
Ans a
विपणन एक प्रक्रिया है जो वस्तु के उत्पादन से पहले ही प्रारंभ होता है बाजार मांग के पहले ही इसकी शुरूआत होती है।

5 निरक्षर उपभोक्ता के लिए कौन सा माध्यम उपयोगी है
a प्रकाशन मीडिया b प्रसारण मीडिया c पोस्टर 
d पारगमन साधन
Ans b
प्रसारण मीडिया के माध्यम से समाचार संदेश और सूचना अविलंब एक साथ करोड़ों लोगों के पास पहुंच जाते हैं।

6 विपणन के निकट दृष्टि की अवधारणा दी गई थी 
a ई डब्ल्यू इमर्शन द्वारा b पीटर एफ ड्रकर द्वारा 
c फिलिप कोटलर द्वारा  d थियोडोर लेबिट द्वारा
Ans d
विपणन की निकट दृष्टि की अवाघरना लेबिट द्वारा 1960में दी गई। इस अवधारणा के अनुसार यह एक ऐसी स्थिति होती है जब कंपनी के पास एक संकीर्ण सोच वाला विपणन दृष्टिकोण होता है और यह मुख्य रूप से कई संभावित विपणन विस्तृत विशेषताओं में से किसी एक पहलू पर ही केंद्रित होता है। उदाहरण के लिए केवल एक गुणवत्ता पर ध्यान केंद्रित करना और ग्राहक की वास्तविक मांग पर ध्यान ना देना मार्केटिंग मायोपिया से संबंधित है।

7 मलाई उतार मूल्य नीति लागू होती है 
a विलासिता की वस्तुओं पर b उपभोग की वस्तुओं पर c आवश्यक वस्तुओं पर    d औद्योगिक वस्तुओं पर
Ans a
मलाई उतार मूल्य नीति विलासिता की वस्तुओं के लिए उपयोगी तथा लाभदायक होती है। इन वस्तुओं की कीमत सामान्य वस्तुओं की तुलना में अधिक रखी जाती है। इसे ही भलाई उतार मूल्य नीति करते हैं। इस युक्ति का प्रयोग उन क्षेत्रों में अधिक लाभ कमाने के उद्देश्य से किया जाता है जहां लोग उस वस्तु के लिए आसानी से भुगतान करने को तैयार होते हैं और वस्तु का विकल्प भी नहीं होता है।
8 निम्नलिखत में कौन वारंटी से वारंटी कौन से संंबंधीत है
a यह संविदा को पूर्ण करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है b यदि कोई उल्लंघन होता है तो पीड़ित संविदा को भंग कर सकता है 
c यह संविदा के मुख्य उद्देश्य के लिए अनिवार्य है 
dयदि उल्लंघन होता है तो पीड़ित पक्ष केवल क्षतीयों की पूर्ति के लिए दावा कर सकता है
Ans d
वारंटी के संबंध में यह उल्लेखनीय है कि यदि आपसी समझौते के मध्य कोई उल्लंघन होता है या क्षति होती है तो पीड़ित पक्ष कार केवल क्षत्रियों की पूर्ति के लिए दावा कर सकता है।

9 बाजार संचार तंत्र योजना के निम्नलिखित चार चरण हैं इन चारों को सही क्रम में व्यवस्थित कीजिए 
A बिक्री भविष्यवाणी में वेयरहाउस प्रबंधन परिवहन और सामग्री प्रबंधन में सक्रिआत्मक उत्कृष्टता विकसित करना 
B ग्राहकों तक पहुंचने के लिए सर्वोत्तम चैनल डिजाइन और नेटवर्क कार्य नीति का चयन करना 
C सर्वोत्तम सूचना प्रणाली उपस्कर नीतियों और प्रक्रियाओं के साथ समाधान को लागू करना
D अपने ग्राहकों के प्रति कंपनी की मूल्य प्रस्तावना पर निर्णय करना
सही विकल्प का चयन करें
a)ABCD  b)DBAC  C )DBCA   d)DCBA
Ans b.

10 विपणन में संचार माध्यम और उसके संचार प्लेटफार्म को सुमेलित करें
 a विज्ञापन           १ब्लॉग 
  b सेल्स प्रमोशन।  २ब्रोशर एवं बुकलेट्स
  c वर्ड ऑफ माउथ  ३सेल्स मीटिंग 
  d व्यक्तिगत विक्रय   ४ प्रतियोगिताएं
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही विकल्प चुने
a) A  २   B  ३  C ५    D१  b) A२   B४   C१    D३
c) A ४    B३    C२    D१    d) A४   B३   C१    D२
Ans b.













salesmanship (विक्रय कौशल/ विक्रय कला)

परिचय 
सामान्यतः विक्रय कौशल और व्यक्तिगत विक्रय दोनों को एक ही समझा जाता है लेकिन इसमें अंतर है. व्यक्तिगत विक्रय एक व्यापक अवधारणा है जिसमें विक्रय कौशल शामिल होता है .

व्यक्तिगत विक्रय में वस्तु का मूल्य निर्धारण, विज्ञापन, वस्तु विकास और अनुसंधान, वितरण चैनल और भौतिक वितरण जैसे तत्व सम्मिलित होते हैं.

 विक्रय कला व्यक्तिगत विक्रय के अंतर्गत उपयोग की जानेवाली एक गतिविधी है.

इसकी परिभाषा विभिन्न विद्वानों ने इस प्रकार दी है 

नॉक्स के अनुसार ,
*विक्रय कला लोगों को क्रय करने के लिए प्रभावित करने की शक्ति है.
 *यह लोगों को समझाने की क्षमता है कि उन्हें पहले से ही इस वस्तु की आवश्यकता है.

 प्रोफेसर स्टीफेंसन के अनुसार 
*विक्रय कला संभावित खरीदार को कुछ प्रयोग करने के लिए प्रेरित करने का सचेत प्रयास है.
* विक्रय के लिए जो वस्तु या सेवा है उसे खरीदने के लिए राजी करना भी विक्रय कला के अंतर्गत शामिल है. 

हॉट क्लॉक के अनुसार 
विक्रय कला लोगों को आनंद पूर्वक और स्थाई रूप से उत्पाद को खरीदने के लिए राजी करने से संबंधित है ताकि लाभ प्राप्त किया जा सके.

 जेसी जगसिया के अनुसार
 विक्रय कला किसी वस्तु की उपयोगिता से संबंधित संदेह, अज्ञानता और आपत्ति को दूर करने की क्षमता है.
निष्कर्ष
 विक्रय कला लोगों को उत्पादों के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ उनकी आवश्यकता की पूर्ति करने हेतु या उनकी आवश्यकता उत्पन्न करने हेतु उत्प्रेरित करने की दक्षता है जिसे विक्रय करता द्वारा प्रयोग में लाया जाता है.
वर्तमान समय में विक्रय कला की अवधारणा 

पुरानी धारणा के अनुसार विक्रय कला जैसे शब्दों से कोई लेना-देना नहीं था. विक्रेता का काम माल के आर्डर लेना और क्रेता  को माल दिखाना तथा अगले ऑर्डर की प्रतीक्षा करना ही शामिल था.
  समय के साथ परिवर्तन हुआ प्रतिस्पर्धा बढ़ने से विक्रय कर्ता को अपने विक्रय कौशल पर ध्यान देना आवश्यक हो गया. आज सेल्समैन क्रेता  के लिए जरूरतों को पैदा करते हैं. उन्हें इस बात का भरोसा दिलाते हैं कि वस्तु किस प्रकार से क्रेता की आवश्यकता की पूर्ति कर सकती है. 
आज विक्रय कला एक रचनात्मक कार्य हो गया है जिसमें ग्राहक को वस्तु की आवश्यकता पैदा करने से लेकर ग्राहक संतुष्टि तक पर ध्यान दिया जाता है. इसमें खरीदार और विक्रेता दोनों के लिए पारस्परिक लाभ को ध्यान में रखा जाता है.
salesman के कर्तव्य 
*वस्तुओं एवं सेवाओं की बिक्री करना
*बिक्री से संबंधित प्रमाणों को संग्रह करना
* सभी शिकायत कर्ताओं को संतुष्ट करना
*बिक्री बैठकों में भाग लेना 
*उत्पाद की बिक्री में आने वाली समस्याओं को हल करना
*ग्राहकों के साथ अच्छे संबंध बनाना
विक्रय कला का महत्व 
वर्तमान समय में विक्रय कला की महत्वपूर्ण भूमिका है. बढ़ते बाजार प्रतिस्पर्धा के चलते उत्पादों की बाजार में कमी नहीं है कमी है तो अच्छे सेल्समैन की.
 कहने का तात्पर्य है कि बाजार में उपलब्ध उत्पादों की कमी नहीं है उत्पादों के विक्रय को लेकर प्रतिस्पर्धा बनी रहती है. विक्रय कला जितनी शानदार होगी उस वस्तु की मांग उतनी ही ज्यादा होगी. विक्रय कला द्वारा जहां कमजोर उत्पाद के लिए बाजार मांग पैदा किया जाता है वहीं दूसरी ओर विक्रय कला के अभाव में अच्छे किस्म के उत्पाद का बाजार मांग का अभाव होता है.
1 उत्पादकों के लिए विक्रय कला का महत्व
विक्रय कला उत्पादक के लिए आंख और कान के रूप में काम करते हैं.
प्रतिस्पर्धी बाजार में उत्पादों के लिए मांग पैदा करना,  नए बाजार की खोज करना ,उपभोक्ताओं के बारे में उत्पादकों को जानकारी देना, उपभोक्ता के अनुरूप वस्तुओं के गुणवत्ता में सुधार करना, बाजार मांग  आंकड़ों की जानकारी इकट्ठा कर संबंधित जानकारी उत्पादकों को विक्रय करता प्रदान करता है जिससे विक्रय नीतियों में बदलाव किया जा सके.
2 उपभोक्ताओं के लिए विक्रय कला का महत्व
विक्रय कला द्वारा उपभोक्ताओं को वस्तुओं के बारे में जानकारी होती है. उपभोक्ताओं का मार्गदर्शन होता है. 
उपभोक्ता बाजार के राजा की तरह होता है इसलिए ज्यादा से ज्यादा अहमियत उपभोक्ता संतुष्टि को दिया जाता है. इसलिए सेल्समैन उपभोक्ता को उत्पादों को सही वस्तुओं से संबंधित निर्णय लेने में मदद करते हैं और वस्तु क्रय करने में भी मदद करते हैं.
इस प्रकार बिना आर्थिक क्रियाकलाप रुकावट के बाजार का काम निर्बाध रूप से चलता रहता है.
विक्रय कला के क्षेत्र
 बढ़ते औद्योगीकरण के चलते बाजार में उत्पाद बढ़ते जा रहे हैं.प्रतिस्पर्धा और बाजार मांग के बीच उत्पादकों को अपने अस्तित्व को बनाए रखने के लिए विक्रय कला पर ज्यादा फोकस करना पड़ रहा है. विक्रय के नए-नए तरीके का उपयोग होना विक्रय कला के क्षेत्र को और ज्यादा विस्तारित करता है. 
वर्तमान तकनीकी और सूचना प्रौद्योगिकी ने इसका दायरा बढ़ा दिया है. आज वही उत्पाद बाजार में मौजूद रह सकते हैं जिन्हें विक्रय कला द्वारा उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जा रहा है .
विक्रय कला का क्षेत्र अब पहले की तुलना में काफी व्यापक हो चुका है. इसमें परिवहन,शिक्षा, बैंकिंग, पेंटिंग, चिकित्सा, बीमा, कानून जैसे कई चीजें शामिल है. विक्रय कला के अंतर्गत उत्पादों का ज्ञान उसके प्रयोग के तरीके, ग्राहकों के व्यवहार का अध्ययन, प्रबंध और संगठन के विषय वस्तु को शामिल किया जाता है. विज्ञापन द्वारा वस्तुओं का प्रचार भी इसमें शामिल होता है. इन सब का प्रयोग करते हुए विक्रयकर्ता वस्तुओं और सेवाओं की जानकारी उपभोक्ताओं तक पहुंचाता है.

 विक्रय कला की उपयोगिता 

1 उत्पादकों के लिए 

विक्रय कला उत्पादकों के लिए उनके अस्तित्व से जुड़ा होता है. विक्रय कला के द्वारा ही वह अपनी वस्तुओं के मांग का सृजन करते हैं और उत्पादों की आपूर्ति उसी पर निर्भर करती है.

 2 समाज के लिए 

समाज की आवश्यकता दिन-प्रतिदिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही हैं. नए उत्पादों के मांग और उनका सृजन सामाजिक दायरे के अंतर्गत होता है जिन पर उत्पादकों की नजर होती है और उन्हीं सामाजिक हितों को ध्यान में रखते हुए विक्रय कला के विभिन्न विधियों का प्रयोग किया जाता है.

 3 सरकार के लिए 

विपणन बाजार के आधार पर नए उभरते विकासशील देशों में विपणन का महत्वपूर्ण योगदान है . खासकर विक्रय कला को लेकर बाजार में वस्तुओं में कड़ी प्रतिस्पर्धा होती है जिसका लाभ सरकार को करों के रूप में प्राप्त होता है .

4 विक्रयकर्ता के लिए 

विक्रय कर्ता के लिए यह काफी उपयोगी होता है. इस में वस्तुओं के विक्रय पर विक्रयकर्ता को वेतन के अतिरिक्त कमीशन भी प्राप्त होते हैं .विक्रय कर्ता एक बार विक्रय कौशल के हुनर का उपयोग कर ले तो इसे बार-बार और दक्षपूर्ण तरीके से अंजाम देता है.

 5 ग्राहकों के लिए

 ग्राहकों को विक्रय कला द्वारा विभिन्न वस्तुओं के प्रयोग की जानकारी होती है. ग्राहक अपनी आवश्यकतानुसार वस्तु का क्रय करते हैं.

6 दीर्घकालीन व्यवसायिक संबंधों को बनाने  के लिए

 विक्रय कला द्वारा विक्रय कर्ता है. व्यक्तिगत रूप से ग्राहकों से जुड़ जाता है जिससे दीर्घकालीन व्यवसायिक लाभ प्राप्त होते हैं 

7 उत्पादों के वितरण के लिए

वितरण के विभिन्न चैनलों में विक्रय कर्ता की महत्वपूर्ण भूमिका होती है.  थोक विक्रेता को या वितरक को यह ग्राहकों के बारे में जानकारी देते हैं और साथ ही विक्रय की रणनीति बनाने में भी आवश्यक सुझाव देते हैं.

 8 नवीकरण को प्रोत्साहन देने के लिए

 समाज को नई वस्तुओं से विक्रय कला द्वारा परिचित कराया जाता है.

उद्यमिता

  उद्यमिता  की परिभाषा उद्यमिता से आशय उद्यमी द्वारा किए जाने वाले  कार्यों  से है जिसमें उद्यमी किसी नए व्यवसाय को स्थापित करने से संबंधित ...