क्याअंतर है capital और Revenue receipts में और capital और Revenue Payment में

Capital Receipt
Business के जिन  assets को खरीदा जाता है उनके विक्रय से या debentures को issue करने से या loan द्वारा प्राप्त cash  capital receipt  यानी पूंजीगत प्राप्तिओं से संबंधित होते हैं.
Revenue Receipt
 ये trading goods  के विक्रय या अन्य प्रकार के व्यापारिक प्राप्ति ओं से संबंधित होते हैं
Capital Payment
 इसमें fixed assets के purchase और loan के payment को शामिल किया जाता है.
इनके साथ ही यह भी जान लें
Revenue payment
 इसमें purchase of goods ,salary ,wages, rent etc. को शामिल किया जाता है।
Capital losses
  Wastage of assets,capital return या issued capital से होता है.
Revenue losses
Wastage of current assets, loss on sale of trading goods  से होता है।
*Revenue loss का अप लेखन संबंधित वर्ष के लाभ से ही किया जाता है जबकि capital loss को विभिन्न वर्षो के लाभों में से अपलिखित किया जाता है. 
कुछ revenue expenses जो capital nature  के हो जाते हैं
Legal expenses
व्यवसाय को स्थापित करते समय किया गया कानूनी व्यय.
Advertising expenses
 बड़ी मात्रा में खर्च की गई राशि
Mantainance and innovation
किसी पुराने मशीन को  चालू करने में किया गया व्यय.
Wages
किसी फिक्स्ड असेट्स को खरीद कर उसे चालू करने में दी गई मजदूरी
Commission and brokerage
 व्यापारिक लेन-देन पर दिया गया ब्रोकरेज या कमिशन revenue expenses होता है जबकि assets के purchase दिया गया ब्रोकरेज या कमीशन capital expenditure के अंतर्गत आता है.

Interest on capital, capital expenses होता है.
 सिर्फ Interest, revenue expenses के अंतरगत आता है।






क्या अंतर है capital expenses और revenue expenses में

प्रायः हमारे साथ confusion बना रहता है capital expenses  और revenue expenses में अंतर को लेकर। दोनों expenses nature के ही होते हैं फिर भी इनके स्वभाव में अंतर होता है ।चलिए बारी-बारी से इन दोनों के अंतर को देखते हैं
Capital Expenses

Capital expenses का आशय उन व्ययो है जो capital nature के होते हैं .
उदाहरण के लिए किसी business unit को स्थापित करने के लिए हमें land& building, plant &machinery   के अलावा भी दूसरी चीजों की आवश्यकता होती है जो fixed assets स्वभाव के होते हैं. इनमें खर्च की गई राशि capital expenses कहलाती है।

Capital expenses से संबंधित मुख्य तथ्य

 1 capital expensez business unit के assets ,liabilities के परचेज से संबंधित होते हैं .

2 capital expenses के द्वारा जो लाभ प्राप्त होते हैं वह 1 वर्ष से ज्यादा के लिए होते हैं.

 3 capital expenses business में बार-बार नहीं किए जाते हैं.
 
4 capital expenses व्यवसाय के प्रारंभिक लागतोopening cost को दर्शाते हैं .

5 यह बिजनेस के working capacity  को बढ़ाते हैं. यह balance sheet में assets की ओर दिखाए जाते हैं.

Revenue expenses

Revenue expenses बिजनेस के दैनिक कार्य संचालन से संबंधित होते हैं .

*ऐसे expenses जो capital nature के assets को maintain रखने के लिए उसे चालू अवस्था में बनाए रखने के लिए किए जाते हैं revenue expenses कहलाते हैं।

 Revenue expense से संबंधित मुख्य तथ्य   

1 revenue expenses business के assets  को चालू अवस्था में बनाए रखने और नए चालू संपत्तियों के  क्र्य से संबंधित होते हैं .

2 revenue expenses से प्राप्त लाभ 1 वर्ष तक का होता है 

3 यह expenses बार-बार होने वाले expenses होते हैं .

4 revenue express वर्त्तमान लागत से संबंधित होते हैं.

 5 इन्हें profit and loss a/c के debit side में दिखाया जाता है.

Auditing की व्यापक परिभाषा

J lancaster  के अनुसार 

Balance sheet  की जांच vouching verification ही auditing है। इस प्रकार यह कहा जा सकता है कि auditing books of accounrs, documents और vouchers जिनके आधार पर लेन देन लिखे जाते हैं का एक investigation है जिससे auditor balance sheet और दूसरे statement के संबंध में जो इन books में बनाए गए हैं अपना रिपोर्ट उन व्यक्तियों को दे सके जिन्होंने उसे appoint किया है।

Wh Hanson के अनुसार


Auditing books of acount और उसके आधार पर निर्मित स्टेटमेंट के सत्यता की जानकारी के लिए किया गया जांच है ।
ऊपरोक्त  definition में trading और non trading organisation दोनों आ जाते हैं जो अधिक व्यावहारिक है.
उपरोक्त परिभाषा से auditingकी कुछ विशेषताएं स्पष्ट होती हैं।

1audit के लिए एक संस्थान का होना आवश्यक होता है चाहे वह profitable हो या non profitable.

2 auditor एक independent व्यक्ति  होना चाहिए .

3 audit का काम voucher और उससे जुड़े other सstatement पर आधारित होता है .

4 audit किसी इंस्टिट्यूशन के बुक्स आफ अकाउंट्स की शुद्धता और सत्यता की जांच है
 
5 audit का कार्य एक निश्चित समय से संबंधित होता है .

6 vouchers के आधार पर ही entry की जांच से सारे तथ्य स्पष्ट नहीं होते कुछ तथ्यों का clerification पूछता से भी ऑडिटर करता है

7auditorअपने कार्य की समाप्ति पर एक रिपोर्ट भी तैयार करता है जिसमें संस्थान के profit or loss उसकी आर्थिक स्थिति books of accounts की शुद्धता के बारे में जानकारी होती है इसे auditors report भी कहा जाता है

क्या है Auditing ?



Auditing शब्द की उत्पत्ति Latin word Audire (औडायर )से हुई है जिसका अर्थ सुनना होता है । यह सुनने का काम judge के द्वारा किया जाता था .
Business ownersको books of account   में किसी प्रकार की शंका होती थी तो उसका accountant,  books of account को लेकर judge के सम्मुख उपस्थित होता था और  उनको  पढ़कर सुनाता था ।
इन पुस्तकों को सुनने के बाद में निर्णय देता था यह judge ही ऑडिटर कहलाता था।

Definition

Jr Batliboi के अनुसार

Auditing का आशय business के books of account  की एक बुद्धिमता पूर्ण और आलोचनात्मक जांच से है जो कि उन documents और vouchers से की जाती है जिनके आधार पर उन्हें लिखा गया है। यह जांच यह जानने के लिए की जाती है कि एक निश्चित समय के लिए बनाया हुआ profit and loss account और balance sheet व्यवसाय के सही profitt या loss को और व्यवसाय की सही स्थिति को प्रदर्शित करते हैं या नहीं।

Spicer and pehla के अनुसार

Auditing, books of account और vouchers  की इस प्रकार जांच है जिसके द्वारा auditor इस तथ्य से स्वयं को संतुष्ट कर सके की balance sheet ठीक से बनाया गया है और यह दी गई सूचनाओं और प्राप्त स्पष्टीकरण के अनुसार तथा जैसा की books of account से स्पष्ट है व्यापार की सच्ची एवं ठीक दशा को दिखाता है और यदि ऐसा नहीं है तो किन कारणों से वह असंतुष्ट है यह balance sheet झूठा अथवा अशुद्ध है.

Ronald A Iris. के अनुसार

आधुनिक रूप में auditing का अर्थ accounting books  व vouchers की एवं अन्य economic व legal books of account की नियमित और वैज्ञानिक जांच है जिससे वास्तविकताओं का निर्धारण किया जा सके और profit &loss account तथाbalance sheet से प्राप्त होने वाले economic condition के संबंध में रिपोर्ट दी जा सके। उपरोक्त परिभाषा की विशेषताएं पता लगाया जाता है.

कैसे हुआAuditing का जन्म और इसकी भारत में शुरुआत

 आधुनिक लेखांकन प्रणाली की शुरुआत के साथ-साथ किताब को रखने के लिए व्यवस्थित प्रणाली को अपनाया जाने लगा जिसके audit की आवश्यकता महसूस हुई.

 इटली के luca Paciolo को  दोहरे लेखांकन का जन्मदाता माना जाता है .

बाद में इंग्लैंड औद्योगिक क्रांति के कारण व्यापार का स्वरूप बढा और व्यापारिक संस्थाओं का उदय हुआ इस  दौरान अंकेक्षण का महत्व पड़ा.

 1844 के English company act द्वारा Balance Sheet बनाना और उसका audit करना अनिवार्य कर दिया .

1881 में The Institute of Chartered Account  की स्थापना इंग्लैंड मे की गई जो Accountant और Auditors को तैयार करते थे .

1993 में British Association of Accountants and Auditors की स्थापना की गई जिसकी परीक्षा पास कर कोई भी व्यक्ति भारत में ऑडिट कर सकता था.

भारत में audit की शुरुआत

1913 में indian company act लागू किया गया और 1914 से भारत में audit की शुरुआत मानी जाती है .

1918 से मुंबई सरकार द्वारा लेखाकर्म का सरकारी डिप्लोमा दिया जाने लगा इस डिप्लोमा के आधार पर भारत में कहीं भी व्यक्ति Audit का काम कर सकता था. 

1932 में सरकार द्वारा Auditors Certificate rule बनाए गए. इस आधार पर Registered Accountants तैयार होते थे .

1948 में लेखाकर्म विशेषज्ञ समिति की स्थापना की गई इसकी सिफारिशों पर CAA 1949 पास किया और ICAI की स्थापना दिल्ली में की गई.

 इस संस्था की स्थापना के पश्चात Auditor की शिक्षा का संचालन इस संस्था के हाथों में चला गया.
 
एक auditor के मापदंडों का निर्धारण यही संस्था करती है .

ICAI 1949 

*स्थान दिल्ली 

*संस्थान का संचालन एक परिषद द्वारा किया जाता है. 

*सदस्यों की अधिकतम संख्या 24 

* केंद्र द्वारा नामांकित व्यक्ति 6 

इसके सदस्य दो प्रकार के होते हैं 

Associates यह अपने नाम के आगे ACA लिखते. 

Fellows यह 5 वर्ष भारत में प्रैक्टिस करने के बाद एक निश्चित फीस जमा करके Fellows बनते और अपने नाम के आगे FCAलिखते .

1956 में भारतीय कंपनी अधिनियम बना इस प्रकार कंपनी अधिनियम 1913 का समापन हो गया.

  अंकेक्षक के अधिकार दायित्व और कर्तव्य को इस अधिनियम द्वारा और स्पष्ट कर दिया गया .

1959 में cost and works accountant की स्थापना की गई। 

 Company Act 1956 सेक्शन 233a के अनुसार cost audit अनिवार्य कर दिया गया.
 
1964 में Chartered accountants regulation पास किया गया. 

Audit के दृष्टि से company act 1956 में कई बार संशोधन किए गए जिनमें वर्ष 1960 1965 1969 1971 1974 1977 1978 1979 1980 1988 2013 मे किए गए संशोधन विशेष रूप से महत्वपूर्ण है इसमें auditor के दायित्व भी बढ़ गए हैं.

Indian independent and professional investment information and credit rating agency (ICRA)

ICRA

इसे औद्योगिक निगम द्वारा बढ़ावा दिया गया

 उद्देश्य

1 संस्थागत और व्यक्तिगत निवेशकों और लेनदारों के लिए मार्ग प्रदर्शन और सूचना प्रदान करना ।

2 वित्तीय बाजारों में पारदर्शिता को बढ़ावा देने के लिए निगमों को सहायता देना।
 
3 बैंकों, निवेश बैंकरों, दलालों को विपणन औजार प्रदान कर के निवेशकों के ऋण रखने योग्य बनाना।

कार्य 

1 क्रेडिट रेटिंग संबंधित सेवाएं ICRA गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों, वित्तीय संस्थाओं, 'सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योगों और निगमों द्वारा जारी ऋणपत्रों की रेटिंग करता है । इसमें दीर्घ ,मध्य और लघु अवधि के वाणिज्य पत्र और डिपाजिट प्रमाण पत्र शामिल किए जाते हैं 

2 सूचना सेवाएं 

*ग्रेडिंग इक्विटी निवेशकों की प्रस्तावित कंपनी की कमाई पर महत्वपूर्ण आंकड़े प्रदान करना इसके कार्यों में से एक है।
* कारपोरेट संस्था द्वारा सामना किए जाने वाले मुख्य मुद्दों की स्पष्ट तस्वीर यह प्रस्तुत करता है ।
*मुद्रा और वित्त से संबंधित भारतीय अर्थव्यवस्था के मौद्रिक और राजस्व क्षेत्र से संबंधित तिमाही रिपोर्ट का यह प्रकाशन करता है।
* कारपोरेट निवेशकों के लिए विश्वसनीय सूचनाएं प्रदान करके उनके निर्णयों को प्रभावित करता है।

3 परामर्श सेवाएं 

इसमें निम्न सेवाओं को शामिल किया जाता है जोखिम प्रबंध ,रणनीतिक सलाह ,पुनर्संगरचना ,समाधान ,नीति निरूपण के लिए इनपुट, बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं, सेवा और निर्माण क्षेत्र में ग्राहक की विशेष जरूरत पर आधारित अध्ययन।

ICRA क्रेडिट रेटिंग के संकेत 

दीर्घ अवधि की प्रतिभूतियां जिसमें ऋण पत्र बांड अधिमान अंश शामिल होते हैं

LAAA उच्च सुरक्षा

LAAA उच्च सुरक्षा मध्यम श्रेणी का जोखिम

LA+ पर्याप्त सुरक्षा

LBBB सुरक्षात्मक रूप से ऊपर नीचे होना

LB जोखिम उन्मुख होते हैं सुरक्षा संकीर्ण होते हैं.

मध्यम अवधि की प्रतिभूतियां

MAAA  उच्चतम सुरक्षा

MAA+ उच्च सुरक्षा

MA+ पर्याप्त सुरक्षा

MB+ पर्याप्त सुरक्षा

MC जोखिम 

लघु अवधि

A1+ उच्चतम सुरक्षा

A2 उच्च सुरक्षा

A3 +पर्याप्त सुरक्षा

A4 +जोखिम

इक्विटी

ERIA निम्न जोखिम

ERIB मध्यम जोखिम

ERIC उच्च जोखिम







Credit Rating Information Services of India Ltd(CRISIL)

CRISIL

CRISIL  को बढ़ावा भारत की औद्योगिक उधार और निवेश निगम लिमिटेड ने दिया। 
इसकी स्थापना ऋण दायित्वों की क्रेडिट रेटिंग के लिए की गई थी जिससे निवेशकों को समय पर ब्याज और मुख्य रकम से युक्त जोखिम को बताया जा सके।

उद्देश्य
 
1अस्थाई ब्याज प्रतिभूतियों में निवेश निर्णय को लेने में व्यक्ति और संस्थागत निवेशकों की सहायता करना।

 2 विशेष प्रकार के ऋण पत्रों पर ब्याज भुगतान के जोखिम के लिए निवेशकों का मार्गदर्शन करना ।

3 कम लागत पर ज्यादा निवेशक  के माध्यम से फंड इकट्ठा करने में कंपनियों की सहायता करना। 

4 व्यापारी बैंक करो दलालों,निगमों, नियामक अधिकारियों के बीच क्रेडिट रेटिंग की धारणा की जागरूकता पैदा करना और वातावरण का निर्माण करना जिससे ऋणों की क्रेडिट रेटिंग किया जा सके।

5 बाजार नियामक प्रणाली का विकास करना जिससे पूंजी बाजार के स्वस्थ विकास और अनुशासन को सुनिश्चित किया जा सके ।

कार्य 

1 क्रेडिट रेटिंग संबंधित सेवाएं 

इसमें कम अवधि ,मध्यम और दीर्घ अवधि के ऋण पत्रों, अधिमान अंश, डिपॉजिट के प्रमाण पत्रों,वाणिज्यिक पत्रों और वित्तीय कंपनियों के दायित्व बैंकों ,वित्तीय संस्थाओं, निर्माताओं और बीमा कंपनियों की रेटिंग की जाती है इसके अलावा चीट फंडों और बैंक कर्मियों की रेटिंग की जाती है ।

2 परामर्श सेवाएं 

यह विभिन्न राज्य सरकारों को परामर्श सेवाएं प्रदान करती हैं। बुनियादी ढांचे के विकास में निजी क्षेत्र की भागीदारी और निवेश योजनाएं निजीकरण प्रक्रिया में सहायता से संबंधित सलाह देते हैं।

3 शोध और सूचना सेवाएं

 CRISILभारतीय अर्थव्यवस्था ,भारतीय पूंजी बाजार, भारतीय उद्योगों और भारतीय कारपोरेट क्षेत्र का अध्ययन करती है। शोध गतिविधियों से कंपनी वित्तीय संस्थानों ,गैर वित्तीय संस्थाओं सरकार और दूसरे अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों को बताने के लिए ऑनलाइन सेवाएं प्रदान करती है।
CRISIL सूचक सेवाएं
CRISIL 500 मैं 79 उद्योगों की 500 कंपनियां शामिल है ।
CRISIL  मिडकैप 200 में 200 मिड कैप स्टॉक्स शामिल है।

 क्रिसिल रेटिंग संकेत

ऋण पत्रों के संबंध में 

*उच्च निवेश ग्रेड   AAA  AA

अनुमानित ग्रेड A BBB

उच्च जोखिम B

पर्याप्त जोखिम C

डिफॉल्ट D

स्थाई जमा के संबंध में 

FAAA उच्च सुरक्षा

FAAA पर्याप्त सुरक्षा

FAA पर्याप्त सुरक्षा

Rc उच्च जोखिम

बांड के लिए 

AAA f अत्यधिक सुरक्षित

AAf सुरक्षित

Af  उचित

BBBf मध्यम सुरक्षा

BBf मध्यम सुरक्षा।




Credit Analysis & Research in Equity Ltd(CARE)

CARE
*स्थापित 
औद्योगिक विकास बैंक द्वारा 

*कार्य की शुरुआत 1993 

*क्रेडिट रेटिंग की शुरुआत 1995

 सेवाएं
 1 उधार दर्जा बंदी

 CARE छोटी अवधि और दीर्घ अवधि दो प्रकार के ऋण पत्रों की क्रेडिट रेटिंग करती है।

 2 सूचना सेवाएं 

इसमें किसी व्यावसायिक उद्योग द्वारा किसी कंपनी उद्योग या विभाग पर मांगी गई सूचना को केयर द्वारा उपलब्ध कराया जाता है। यह बैंकों और व्यवसाय के लाभ के लिए कंपनियों पर क्रेडिट रिपोर्ट बनाती है ।

3 इक्विटी शोध

 यह शेयर बाजार के सूचीबद्ध शेरों का विस्तार से अध्ययन करत है उनमें संभावित विजेता और हारने वालों का पता लगाती है ।

4 भारत सरकार द्वारा अधिसूचित तरल पेट्रोलियम गैस और बढ़िया केरोसिन तेल के समानांतर बाजारों के कार्य निष्पादन का क्रेडिट रेटिंग चेक द्वारा ही किया जाता है। 

5 अन्य सेवाएं

क CARE ऋण रेटिंग 

यह संस्था बैंकों और विकसित वित्तीय संस्थाओं में निर्णय प्रक्रिया सहयोग देने वाली मूल्यवान सूचनाएं प्रदान करती है ।

ख सुधार विश्लेषण रेटिंग

 यह उन व्यवसायिक संस्थाओं के लिए किया जाता है जो बैंकों वित्तीय संस्थाओं या गैर बैंकिंग जो कंपनियां है उनसे उधार सुविधाओं को बढ़ाने या प्राप्त करने की इच्छा रखते हैं ।

ग ब्याज दर ढांचा मॉडल

 केयर द्वारा एक सॉफ्टवेयर पैकेज और ब्याज दर ढांचा मौजूद मॉडल को विकसित किया गया है जिसमें कंपनियां के जो उधार लेने वाले हैं उधार जोखिम और ट्रैक रिकॉर्ड के साथ ब्याज दर का निर्धारण किया जाता है।
CARE के रेटिंग संकेत 

क लंबी अवधि और मध्य अवधि के पत्र

AAA ज्यादा सुरक्षित

AA  सुरक्षित थोड़ा जोखिम

A     मूल राशि और ब्याज की सुरक्षा

BBB.  सुरक्षा 

BB उचित सुरक्षा और जोखिम

ख छोटी अवधि के पत्र

PR1 प्रतियोगिता यह प्रदत प्रतिज्ञा दायित्वों को लौटाने की उच्च क्षमता

PR2  लौटने आने की मौजूद मजबूत क्षमता

PR3 पर्याप्त क्षमता

PR4 समय पर चुकाने की न्यूनतम क्षमता

 ग लंबी अवधि के ऋण

AAAL  अच्छे मार्जिन के साथ सुरक्षा

AA (L) कम मार्जिन के साथ सुरक्षा

BBB (L) दर्जा बंदी के समय ब्याज और मूल राशि के भुगतान के लिए पर्याप्त सुरक्षा

BB (L) ब्याज और मूल राशि केेेे लिए अपर्याप्तत सुरक्षा।



उद्यमिता

  उद्यमिता  की परिभाषा उद्यमिता से आशय उद्यमी द्वारा किए जाने वाले  कार्यों  से है जिसमें उद्यमी किसी नए व्यवसाय को स्थापित करने से संबंधित ...