merchant banking

13वीं शताब्दी में यूरोप में कुछ व्यापारिक परिवारों द्वारा वस्तुओं के क्रय विक्रय और प्रबंध से संबंधित कार्य किए जाते 
थे . इनके द्वारा बैंकिंग के कार्य भी किए जाते थे. यह राजाओं के बैंकर का कार्य भी करते थे और तटवर्ती क्षेत्रों में व्यापार के लिए वित्तीय सहायता भी देते थे .इस प्रकार 13वीं शताब्दी में  Merchant Bank उद्भव हुआ. 

मर्चेंट बैंकिंग

मर्चेंट बैंकिंग के अंतर्गत ऐसे संस्थाओं के कार्य आते हैं जो कर्पनियों के लिए प्रतिभूतियां लेते हैं ,विलय और अधिग्रहण से संबंधित कार्य करते हैं, अभिगोपन से संबंधित कार्य करते हैं, क्रेडिट कार्ड जारी करते हैं ,लघु स्तरीय उद्योगों के लिए धन की व्यवस्था करते हैं ,बीमा, वित्तीय परामर्श ,पोर्टफोलियो प्रबंधन ,जोखिम पूंजी से संबंधित कार्य करते हैं.

 Merchant Bank द्वारा दी जाने वाली सेवाएं


1 corporate  परामर्श 

 Merchant Bank कारपोरेट इकाइयों को समय-समय पर व्यापारिक कार्यों के लिए परामर्श देते हैं ताकि उनके कार्यों में सुधार होता रहे और निवेशकोंकीदृष्टिमेंकारपोरेट की छवि अच्छी बनी रहे जिससे इनके प्रतिभूतियों का बाजार मूल्य बढ़ सके.

2 प्रोजेक्ट से संबंधित सलाह देना

इसके अंतर्गत व्यवसाय के लिए संभावित प्रोजेक्ट और उसके कार्यान्वयन के लिए उठाए जाने वाले कदम पर परामर्श दिया जाता है जिसमें प्रोजेक्ट लागत का अनुमान, वित्तीय साधनों और विभिन्न प्रकार के प्रतिभूतियों की संरचना, प्रोजेक्ट के क्रियान्वयन के लिए वैधानिक पक्षों का गठन और सरकार द्वारा प्रोजेक्ट की सहमति से प्रदान करने से संबंधित कार्य किया जाता है.

3 कंपनी के विलय और हस्तांतरण का प्रबंध करना 

इसके अंतर्गत निगम में विलय और हस्तांतरण से संबंधित कार्यों का निष्पादन मर्चेंट बैंकों के द्वारा किया जाता है. दो या दो से अधिक कंपनियों के विलय के लिए या एक कंपनी द्वारा दूसरे कंपनी के अधिग्रहण के लिए इन बैंकों द्वारा आवश्यक सेवाएं दी जाती हैं जिसके बदले में  एक निश्चित फीस ली जाती हैं.

4 प्रतिभूतियों के निर्गमन का प्रबंधन करना 

प्रतिभूतियों के निर्गमन से संबंधित कार्यों में निम्न सेवाएं सम्मिलित की जाती हैं
 प्रोस्पेक्टर्स तैयार करना , निर्गमन की योजना बनाना और बजट तैयार करना ,ब्रोकरेज अभिगोपन से संबंधित समझौते करना, प्रतिभूतियों के निर्गमन के लिए विज्ञापन देना , स्टॉक एक्सचेंज में प्रतिभूतियों को सूचीबद्ध करने में सहायता करना ,बोनस इश्यू या नए इश्यू  के संबंध में सलाह देना .

5 कंपनी के पूंजी पुनर्गठन से संबंधित सेवाएं

इसके अंतर्गत निम्न प्रकार की सेवाएं आती हैं 
कंपनी के मेमोरेंडम ऑफ कंट्रोलर ऑफ़ कैपिटल इश्यू को तैयार करना और उसकी सहमति प्राप्त करने में सहायता करना .
बीमार इकाइयों के पूंजी संरचना का सुझाव देना .
फॉरेन एक्सचेंज रेगुलेशन एक्ट द्वारा संचालित कंपनियों को पूंजी निर्माण में सहायता प्रदान करना है.

6 लोन सिंडिकेशन का कार्य करना

 इसके अंतर्गत मर्चेंट बैंक ऋणदाता और वित्तीय संस्थाओं से वित्तीय सहायता के लिए ऋण आवेदनों से संबंधित पार्टी की सहायता करते हैं .इसके लिए आवश्यक वैधानिक दस्तावेजों  से संबंधित औपचारिकताओं की पूर्ति के लिए भी पार्टी की सहायता करते हैं. 

7.पोर्टफोलियो प्रबंधन  

इसके अंतर्गत मर्चेंट बैंक निवेशकों को निवेश निर्णय से संबंधित परामर्श देते हैं की विभिन्न प्रतिभूतियों में कितनी राशि का निवेश हो इसमें निवेश के उद्देश्य निवेश पर लगने वाले टैक्स और रिटर्न को ध्यान में रखा जाता है .

8 पट्टे की सेवाएं

 मर्चेंट बैंक पट्टे के लिए संपत्ति और वित्त की सुविधाएं प्रदान करते हैं पट्टा संपत्ति के स्वामी और प्रयोग करता के बीच के निश्चित समय अवधि के लिए समझौता होता है जिसमें संपत्ति का प्रयोग करता स्वामी को रेंट देता है 

9 तकनीकी और वित्तीय सहयोग 

तकनीकी और वित्तीय सहायता के रूप में यह निगमों को आवश्यकतानुसार तकनीकी में परिवर्तन करने हेतु विशेषज्ञों के रूप में सलाह देते हैं और इससे संबंधित संयंत्रों के लिए वित्तीय सहायता की व्यवस्था करते हैं.

10 म्युचुअल फंड को संचालित करना 

यह निवेशकों से प्राप्त कोषों को विभिन्न प्रकार के प्रतिभूतियों में इस प्रकार निवेश करते हैं जिससे जोखिम कम हो और निश्चित रिटर्न भी मिलता रहे . इसके लिए म्यूच्यूअल फंड का संचालन  किया जाता है.

मर्चेंट बैंकर के उत्तरदायित्व

1 प्रतिभूति बाजार के साथ जुड़ाव 

सेबी द्वारा मर्चेंट बैंकर को प्रतिभूति बाजार में व्यापार करने का प्रमाण पत्र दिए जाने पर प्रतिभूति बाजार के कार्यों के अलावा वह अन्य प्रकार के  प्रतिभूतियों के व्यापार कार्य नहीं कर सकता है.

2 लेखा पुस्तकों से संबंधित रिकॉर्ड तैयार करना 

इसके अंतर्गत मर्चेंट बैंकर लेखा लेखांकन से संबंधित रिकॉर्ड और दूसरे अन्य दस्तावेज तैयार करता है जिसमें बैलेंस शीट संबंधित अवधि का लाभ हानि खाता है इनके ऑडिट रिपोर्ट निर्गमन प्रबंध के प्री इशू और पोस्ट ईशु से संबंधित दस्तावेज और रिकॉर्ड सम्मिलित होते हैंजिसकी सूचना और तैयार करने का स्थान sebi को बताना पड़ता है.

3 छमाही परिणाम को प्रस्तुत करना 

मर्चेंट बैंकर के पूंजी की पर्याप्त मात्रा की जानकारी प्राप्ति हेतु सेबी इसके अर्धवार्षिक ऑन ऑडिटेड वित्तीय परिणामों की जांच कर सकता है और इस संदर्भ में मर्चेंट बैंकर को अनऑडिटेड फाइनेंशियल स्टेटमेंट को सेबी के समक्ष प्रस्तुत करना होता है.

4 लेखा पुस्तकों और उस पर आधारित रिकॉर्ड व अन्य दस्तावेजों को तैयार करना 

प्रत्येक मर्चेंट बैंकर के लिए यह आवश्यक होता है कि वह कम से कम 5 वर्षों के लेखांकन पुस्तकों के रिकॉर्ड व उसे संबंधित अन्य दस्तावेजों को तैयार रखें जिसकी जानकारी सेबी को होनी चाहिए.

5 ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार कदम उठाना 

मर्चेंट बैंकर द्वारा ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर दो महीने के अंदर ऐसा कदम उठाना चाहिए जिनसे कमियों या दोषों को दूर किया जा सके.

6 अंडरराइटिंग से संबंधित उत्तरदायित्व 

मर्चेंट बैंकर जिस निर्गमन का प्रबंध करता है उसका वह प्रमाण पत्र सेबी  द्वारा प्राप्त करता है. अभिगोपन से संबंधित धारणा के अंतर्गत वह कुल अभिगोपन जिसका उत्तरदायित्व उसके पास है या ₹2500000 में से जो भी कम हो उस राशि का 5% न्यूनतम अभिगोपन की राशि के रूप में स्वयं स्वीकार करता है. 

7 अन्य शेयरों के अधिग्रहण की मनाही 

कोई भी मर्चेंट बैंकर या उसका निदेशक पार्टनर या मुख्य अधिकारी अपने क्लाइंट के साथ उसकी प्रतिभूतियों में किसी प्रकार के सौदे में दाखिल नहीं होगा.

8 बोर्ड को जानकारी देना 

मर्चेंट बैंकर द्वारा किसी व्यापार में प्रविष्ट होने की जानकारी सेबी को 15 दिनों के अंदर दी जाती है उसके द्वारा प्रतिभूतियों के अधिग्रहण का विवरण भी सेबी के समक्ष प्रस्तुत किया जाना चाहिए.

9 अनुरोधक अधिकारी की नियुक्ति

 प्रत्येक मर्चेंट बैंकर का यह दायित्व होगा कि वह अपने यहां एक अनुरोध अधिकारी की नियुक्ति करें जो नियम कानून अधिग्रहण निर्देश आदेश जो सेबी द्वारा दिए जाते हैं उसकी पूर्ति के लिए उत्तरदाई होगा.

10 सेबी को निरीक्षण का अधिकार 

सेबी द्वारा विभिन्न उद्देश्यों की पूर्ति हेतु यदि किसी मर्चेंट बैंक का निरीक्षण करना हो तो वह एक या दो व्यक्तियों को निरीक्षण अधिकारी के रूप में नियुक्त कर सकता है ताकि मर्चेंट बैंकरों के लेखा पुस्तकों के रिकॉर्ड और दस्तावेजों से संबंधित पुस्तकों की जांच की जा सके.

11 अंकेक्षक की नियुक्ति 

निरीक्षण और जांच पड़ताल के लिए सेबी द्वारा योग्य अंकेक्षक को नियुक्त किया जा सकता है 

12 मर्चेंट बैंकर द्वारा कर्तव्य पालन नहीं करने की स्थिति में सेबी  उस पर कार्यवाही कर सकता है.



वित्तीय सेवाएं

वित्तीय सेवाएं वित्तीय प्रणाली के घटकों में से एक हैं जो विभिन्न क्रेडिट उपकरणों वित्तीय उत्पादों और सेवाओं के माध्यम से विभिन्न प्रकार के वित्त प्रदान करती हैं

 वित्तीय  सेवाओं के प्रकार

1कोष आधारित वित्तीय सेवाएं 
2फीस  आधारित वित्तीय सेवा 

1 fund based financial services 
 कोष आधारित वित्तीय 

Lease finance, hire purchase  and consumer credit,bill discounting, venture capital, housing finance, insurance services , factoring

2 fee based financial services 
 फीस आधारित वित्तीय सेवाएं

Portfolio management,  mergering and acquisitions, capital restructure, credit rating ,stock broker ,loan syndication.

Lease finance

इसके अंतर्गत पट्टा दाता द्वारा पट्टेदार को एक निश्चित अवधि के लिए संपत्ति का हस्तांतरण एक निश्चित किराए के बदले किया जाता है .संपत्ति का उपयोग पट्टेदार द्वारा ठीक उसी प्रकार किया जाता है जैसे उसकी यह व्यक्तिगत संपत्ति हो .संपत्ति के मरम्मत रखरखाव और होने वाले खर्च इसके अलावा उससे होने वाले अप्रत्याशित लाभ भी पट्टेदार के ही होते हैं. पट्टे की अवधि समाप्त होने पर पट्टादार संपत्ति को वापस कर सकता है या नया संविदा पट्टादाता के साथ पुनः कर सकता है.

Hire purchase 

किराया क्रय पद्धति के अंतर्गत स्वामी द्वारा संपत्तियों का हस्तांतरण एक निश्चित अवधि के लिए क्रेता को प्रयोग करने के लिए की जाती है. इस अवधि तक संपत्ति का क्रेता स्वामी को एक निश्चित किराए की राशि देता है. संपत्ति के मरम्मत और रखरखाव रखरखाव का खर्च भी संपत्ति के स्वामी द्वारा किया जाता है. किराए की अवधि समाप्त होने पर वह संपत्ति पुनः स्वामी को  क्रेता द्वारा  लौटा दी जाती है.

Bill discounting 

बिल डिस्काउंटिंग वित्तप्राप्ति के साधन है जिनके द्वारा बिना समपार्श्विक प्रतिभूतियों के उधार प्राप्त किया जा सकता है. बैंक बिल रिसिवेबल को बट्टे पर खरीद कर प्राप्ति की तिथि पर उसे प्रस्तुत करता है और बिल की वसूली करता है. बैंक द्वारा बिलों की बट्टे पर खरीदारी एक तरह से उनके द्वारा पार्टी को दिया जाने वाला उधार होता है.

Venture capital

किसी नए व्यवसाय को स्थापित करने के लिए या चालू व्यवसाय की नई इकाइयों की स्थापना के लिए पूंजी की आवश्यकता होती है जिसमें जोखिम तत्व सम्मिलित होता है. इस जोखिम को वहन करने वाली कोई कंपनी होती है या कोई फॉर्म या कोई व्यक्ति विशेष.  सामान्यत : इस्टार्टअप व्यवसाय के लिए एंजल इन्वेस्टर्स द्वारा पूंजी लगाई जाती है जो इन व्यवसाय मॉडल्स को अच्छे तरीके से अध्ययन करते हैं और लंबी अवधि के लिए लाभ की अपेक्षा से इस प्रकार के व्यवसाय में निवेश करते हैं.

Housing finance 

हाउसिंग फाइनेंस कंपनी द्वारा कोष आधारित सेवाओं में होम लोन की सुविधाएं लोगों को दी जाती है. इसमें उधार देने वाली कंपनी एक निश्चित इंटरेस्ट रेट पर ईएमआई के साथ उधार चुकाने का विकल्प देती है जिसमें नए घर की खरीद ,घर का निर्माण कार्य ,घर के मरम्मत या घर की अतिरिक्त संरचना को पूरा करने के लिए कंपनियां उधार देती हैं.

Portfolio management 
 
 यह वित्तीय बाजार में जोखिम और निवेश का मिलाजुला रूप होता है जिसके अंतर्गत निवेशक के फण्ड को बाजार प्रतिभूतियों में इस प्रकार निवेश किया जाता है कि जोखिम भी कम हो और निश्चित आय भी निवेशक को मिलती रहे. पोर्टफोलियो मैनेजमेंट का काम वित्तीय सेवा प्रदाता कंपनी द्वारा किया जाता है.
 
Credit Rating
 
क्रेडिट रेटिंग के अंतर्गत क्रेडिट रेटिंग एजेंसी किसी भी कंपनी के ऋण भुगतान क्षमता का निर्धारण करती हैं और उनकी श्रेणी का निर्धारण भी करती हैं.

विभिन्न प्रकार के संस्थाओं द्वारा जो क्रेडिट रेटिंग करवाया जाता है उनका मुख्य उद्देश्य वित्तीय कंपनियों से उन संस्थाओं को वित्त सहायता प्राप्त करना होता है जिसके अंतर्गत उधार लिए गए रकम के देने की क्षमता के निर्धारण को वित्त प्रदान करने वाली संस्थाएं देखती हैं और उसके अनुसार मौजूद संस्था को वित्तीय सहायता प्रदान करने का आश्वासन देती हैं.

Stock broker
 
stock broker भी कंपनी के  शेयर,  बांड या ऋण पत्रों  के अभिगोपन ,क्रय- विक्रय का कार्य करते हैं और यह कार्य फीस पर आधारित होता है.

Loan syndication 

Loan syndication  के अंतर्गत जब किसी व्यक्तिगत उधार कर्ता को लोनकी बड़ी राशि की आवश्यकता होती है तो उधार देने वाली संस्थाएं इस प्रकार की बड़ी रकम के लिए एक सिंडिकेट का गठन करती हैं जो कई ऋण दाता ओं का समूह होता है . इस सिंडिकेट द्वारा दिए गए उधार की राशि का जोखिम विभिन्न ऋणदाताओं में बंट जाता है .




 

क्या है अंकेक्षण कार्यक्रम

अंकेक्षण कार्यक्रम अंकेक्षक के कार्यप्रणाली की एक रूपरेखा है जो विस्तृत रूप से लिखी हुई होती है. इसी के अनुसार अंकेक्षक अपना कार्य निष्पादन करता है . चुकी अंकेक्षक कार्य करने से पहले अपना कार्यक्रम लिखित रूप में पूर्व में ही बनाता है इसलिए इसे अंकेक्षण कार्यक्रम कहते हैं.

अंकेक्षण कार्यक्रम की विशेषताएं

1 अंकेक्षण कार्यक्रम एक लिखित कार्यक्रम होता है .

2 अंकेक्षण कार्यक्रम में प्रत्येक मत स्पष्ट रूप से लिखे होते हैं. इसमें अंकेक्षक अपने कर्मचारियों को वह सूचनाएं भी देता है जिसका अंकेक्षण के दौरान महत्वपूर्ण योगदान होता है.

 3 अंकेक्षण कार्यक्रम का विभाजन इस प्रकार से किया जाता है कि अब उनके क्षण कार्य करने वाले कर्मचारी उन कार्यों को का निपटान अच्छे तरीके से कर सकें.

 4 अंकेक्षण कार्यक्रम लोचदार तरीके से बनाया जाता है जिन्हें आवश्यकता पड़ने पर बदला जा सके या समय के अनुसार उस में परिवर्तन लाया जा सके.

5 कार्य क्षेत्र के आधार पर अंकेक्षण कार्यक्रम इस प्रकार होना चाहिए कि उसमें समय और धन का दुरुपयोग नहीं हो.

6 अंकेक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत अंकेक्षक अपने कर्मचारियों के बीच कार्यों का बंटवारा इस प्रकार से करता है कि उनके उत्तरदायित्व का स्पष्ट निर्धारण हो और अंकेक्षण कर्मचारी कार्य को अच्छे तरीके से संपादित करें.

7 अंकेक्षण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य  कार्य का सुचारु ढंग से निष्पादन करवाना कार्य में एकरूपता लाना और किसी लेनदेन की जांच केना छुटने से है.

8 एक अच्छे अंक शिक्षण कार्यक्रम में कर्मचारियों के लिए हस्ताक्षर तारीख व कार्य के लिए अलग-अलग कॉलम होने चाहिए.

8 अंकेक्षण कार्यक्रम की समय-समय पर जांच होनी चाहिए जिससे इस में होने वाली कमियों के बारे में पता चल जाए और उसे दूर किया जा सके.

अंकेक्षण कार्यक्रम के उद्देश्य 

1अंकेक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य यह विश्वास दिलाना है कि कार्य का निष्पादन समुचित तरीके से हुआ है. 

2 प्रत्येक कर्मचारी ने अपने उत्तरदायित्व का निर्वाह अच्छे तरीके से किया है. 

3 प्रत्येक कर्मचारी और उसके कार्यों के प्रति अंकेक्षक सतर्क रहा है .

4 कार्य विभाजन के दौरान जो गड़बड़ियां हुई हैं उन गड़बड़ियों को ढूंढ कर उसे दूर करने का प्रयास किया गया है

5  मार्गदर्शन और अंकेक्षण प्रतिवेदन तैयार करने में सहायक होता है. 

अंकेक्षण कार्यक्रम के लाभ

1कुशल व्यक्तियों द्वारा कार्य का निष्पादन होने से त्रुटियों और छल कपड़ों को ढूंढना आसान हो जाता है और इनके छूटनेकी संभावना समाप्त हो जाती है .

2 कार्य की प्रगति की रिपोर्ट दिन प्रतिदिन मिलती रहती है. 

3 कर्मचारियों की कार्य क्षमता में वृद्धि होती है .

4 कार्ययोजना  के अनुसार होते हैं

5 समय की बचत होती है .

6 कार्य में एकरूपता होती है 

7अंकेक्षण के सिद्धांतों का पालन होता है .

8न्यायालय में साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है.

9 यह भावी अंकेक्षण के लिए योजना का आधार होता है.

अंकेक्षण कार्यक्रम के दोष

 1 कार्य में नीरसता होती है क्योंकि अंकेक्षण का कार्य पूर्व निर्धारित तरीके से किया जाता है और कर्मचारी को अपने कार्यों की सीमा पता होती है इसलिए वह यंत्र वत काम करता है .

2 कर्मचारियों पर नैतिक प्रभाव का अभाव होता है इसलिए अंकेक्षण के क्रियाओं की पूर्ण जानकारी होने के कारण वह छल कपट को प्रश्रय देते हैं.

 3 योग्य कर्मचारियों को कम प्रोत्साहन मिलता है क्योंकि यंत्र वत कार्य करने के चलते वह कर्मचारी अपनी योग्यता का प्रदर्शन नहीं कर पाते .

4 अंकेक्षण कार्यक्रम छोटे व्यवसाय के लिए खर्चीला होता है.

 5 अंकेक्षण कार्यक्रम अंकेक्षक द्वारा बनाया जाता है इसलिए इसमें कर्मचारियों को व्यक्तिगत निर्णय लेने की कोई आजादी नहीं होती है.

 6 प्रत्येक संस्था के लिए अंकेक्षक अलग-अलग कार्यक्रम तैयार करता है जिससे समय की बर्बादी होती है अंकेक्षण कार्यक्रम कम आयु के कर्मचारियों के द्वारा बनाए जाने पर हमेशा छल कपट का भय बना रहता है.

होम्स के अनुसार

एक लोचदार योजनाबद्ध जांच की प्रक्रिया को अंकेक्षण कार्यक्रम कहा जाता है.

 स्टैटलर के अनुसार 

नियोक्ता के वित्तीय विवरणों के विषय में राय बनाने हेतु पालन की जाने वाली समस्त क्रियाओं की रूपरेखा को अंकेक्षण कार्यक्रम कहा जाता है.


अंकेक्षण के प्रकार

अंकेक्षण को चार आधारों पर वर्गीकृत किया गया है 

a समय के आधार पर 
b अनिवार्यता के आधार पर 
c क्षेत्र के आधार पर 
d विशिष्ट प्रयोजन के आधार पर
a समय के आधार पर 
1वार्षिक अंकेक्षण 
2 चालू अंकेक्षण 
3 अंतरिम अंकेक्षण 

b अनिवार्यता के आधार पर
 1 ज्वाइंट स्टॉक कंपनी 
2 विशेष अधिनियम के अंतर्गत पंजीकृत संस्था 
3 ट्रस्ट का अंकेक्षण 
4 ऐfच्क्षक अंकेक्षण 
इसमें एकाकी व्यवसाय साझेदारी व्यवसाय गैर व्यापारिक संस्थाओं का अंकेक्षण और अन्य व्यक्तियों का अंकेक्षण आता है.
c क्षेत्र के आधार पर 
1पूर्ण अंकेक्षण 
2 आंशिक अंकेक्षण 
3 प्रमाणिक अंकेक्षण 
4 प्रासंगिक अंकेक्षण
d विशिष्ट प्रयोजन के आधार पर 
1 रोकड़ा अंकेक्षण 
2 बैलेंस शीट अंकेक्षण 
3 विशेष अंकेक्षण 
4 वैधानिक रिपोर्ट अंकेक्षण 
5 सिस्टम अंकेक्षण
6 प्रबंध अंकेक्षण 
7 स्वामित्व अंकेक्षण 
8 संचालन आत्मक अंकेक्षण 
9 लागत अंकेक्षण
 उपरोक्त कथ्य अंकेक्षण के वर्गीकरण को दर्शाते हैं किंतु हम महत्वपूर्ण बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए और परीक्षा की दृष्टि से प्रमुख प्रकारों की चर्चा करेंगे 
a सामायिक अंकेक्षण
 सामाजिक अंकेक्षण का कार्य वित्तीय वर्ष की समाप्ति के पश्चात शुरू होता है और तब तक चलता है जब तक की सभी पुस्तकों का अंकेक्षण नहीं हो जाए सामाजिक अंकेक्षण या वार्षिक अंकेक्षण के लाभ 
1 अंकेक्षण के कार्य में समय की बचत होती है इसलिए यह मितव्यई होता है .
2 अंकेक्षण कार्य में स्वतंत्रता बनी रहती है .
3 कार्यों में पुनरावृति की संभावना कम होती है 
4 अंकेक्षण का कार्य समय पर समाप्त होता है .

दोष
गहन जांच की कमी होती है क्योंकि वर्ष समाप्ति के पश्चात यहशुरू होता है.  
2 अंकेक्षण प्रतिवेदन में विलंब होता है 
3 समय पर सलाह का अभाव होता है क्योंकि अंकेक्षण का कार्य विलंब से शुरू होता है.

2 चालू अंकेक्षण

इसमें अंकेक्षण का कार्य लगातार चलता रहता है या रुक रुक कर वर्ष पर्यंत चलता रहता है.

लाभ

1 गलती और कपट का शीघ्र पता चल जाता है. 
2 समय का सदुपयोग होता है.
3 चालू अंकेक्षण में अंकेक्षक रिपोर्ट वित्तीय वर्ष की समाप्ति के दौरान तैयार करता है.
4 इसमें अंकेक्षण और लेखांकन के कार्य साथ साथ चलते रहते हैं .
5 लेखा पुस्तकों की गहन जांच हो जाती है. 

दोष 

1 संस्था के कर्मचारियों के कार्य में बाधा उत्पन्न होती है क्योंकि अंकेक्षक द्वारा कर्मचारियों के हिसाब किताब की सत्यता की पुष्टि बीच-बीच में आकर की जाती है.

2 कार्य की सदस्यता का अभाव होता है क्योंकि अंकेक्षण कार्य अलग-अलग समय पर होते रहते हैं.
 
3 चालू अंकेक्षण के दौरान संस्था के कार्य के तरीके में ह्रास होता है और संस्था के कर्मचारी कार्य के लिए पूर्णता अंकेक्षक पर निर्भर करने लगते हैं.

4 अंकेक्षण रिपोर्ट में विलंब होता है.

चालू अंकेक्षण की परिभाषा

स्पाइसर और पैगलर के अनुसार 

चालू अंकेक्षण वह है जहां अंकेक्षक का स्टाफ वर्ष भर कार्य में व्यस्त रहता है और चालू वित्तीय वर्ष के दौरान निश्चित समय अंतराल से उपस्थित रहता है और अंतरिम अंकेक्षण संपन्न करता है .

एसडब्ल्यू रालैंड के अनुसार 

चालू अंकेक्षण वह है जो वित्तीय वर्ष के शुरू होने पर शुरू होता है और वर्ष समाप्त होने पर समाप्त होता है इस प्रकार चालू अंकेक्षण से तात्पर्य संस्था में अंकेक्षण कार्य के संबंधित वित्तीय वर्ष में लगातार चलते रहने से है जो रुक रुक कर या निश्चित समय अंतराल पर संबंधित वर्ष में चलते रहते हैं.

3 अंतरिम अंकेक्षण 

जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है  अंतरिम अंकेक्षण से तात्पर्य ऐसे अंकेक्षण से है जिसे वित्तीय वर्ष की समाप्ति से पूर्व ही खास उद्देश्य से कराया जाता है 
इस अंकेक्षण  में अंकेक्षक रिपोर्ट की आवश्यकता नहीं होती है  .
*ऐसे अंकेक्षण आंतरिक लाभांश की घोषणा करने लिए किये जाते हैं .
*साझेदारी में साझेदारों को प्रवेश उसके दिवालिया होने पर या उनके विघटन पर अंकेक्षणङ कराया जाता है संयुक्त स्कंध वाली कंपनियों के संबंध में कंपनी के एकीकरण उनके विलय या पुनर्निर्माण के समय भी आंतरिक अंकेक्षण का कार्य कराया जाता है.
 
शासकीय अंकेक्षण
 
शासकीय अंकेक्षण से तात्पर्य शासकीय कार्यालयों और विभाग के हिसाब किताब का अंकेक्षण है.भारत में इसके सबसे बड़े अधिकारी को कंट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल कहा जाता है  जिसकी नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है .
कहने का तात्पर्य है कि शासकीय अंकेक्षण के अंतर्गत सरकार द्वारा संचालित विभागों का अंकेक्षण किया जाता है जिसमें कई अधिकारी और कर्मचारी होते हैं .राज्य स्तर पर प्रत्येक राज्य में महालेखापाल कार्यालय होता है जो राज्य में केंद्र सरकार के विभागों के हिसाब और किताब राज्य सरकार के विभागों के हिसाब और किताब के लेखक की जांच करता है .

प्रमाणिक अंकेक्षण 

यह  अंकेक्षण प्रणाली उन्हीं संस्थाओं के लिए काम करती है जिनमें पहले से ही  आंतरिक निरीक्षण व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू हो. इसमें कुछ मद की पूर्ण जांच और विश्लेषण किया जाता है और शेष मदों की परीक्षण जांच की जाती है.

स्थिति विवरण अंकेक्षण 

स्थिति विवरण व्यवसाय का दर्पण होता है जो लेखांकन वर्ष के अंत में व्यवसाय के संपत्ति और दायित्व की स्थिति को दर्शाता है .गैर व्यापारिक संगठनों और बड़े-बड़े व्यवसायिक संस्थानों के लिए स्थिति विवरण अंकेक्षण अनिवार्य होता है.
विशेष अंकेक्षण
 
कंपनी अधिनियम द्वारा स्थापित संस्थाएं तथा  विशेष प्रावधान के अंतर्गत स्थापित संस्थाएं सरकार के आदेश पर विशेष अंकेक्षण कराती हैं. इस अंकेक्षण में अंकेक्षक की नियुक्ति सरकार द्वारा की जाती है या यह अधिकार अन्य चार्टर्ड अकाउंटेंट्स के फॉर्म को दिया जाता है.
 
प्रबंधकीय अंकेक्षण प्रबंध

प्रबंधन के क्षण के अंतर्गत अंकेक्षक संस्था के संगठन चार्ट उसके नियमावली और प्रबंध के दायित्व कर्तव्य की अध्ययन कर प्रबंध की जांच करता है साथ ही प्रबंधकों के अधिकार के अनुसार दिए गए आदेश की भी जांच करता है जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि प्रबंध द्वारा संस्था हित में अधिकारों और दायित्वों का प्रयोग किया गया है परिचालन अंकेक्षण इसके अंतर्गत अंकेक्षक संस्था के विभिन्न विभागों के संचालन की जांच करता है और विभिन्न स्तरों पर प्रबंध को सुझाव देता है इसमें जांच करना मूल्यांकन करना सत्यापन करना रिपोर्ट देना सुझाव देना शामिल किया जाता है.

लागत अंकेक्षण 

लागत लेखांकन का आशय लागत के लेखों का सत्यापन करना और लागत लेखे से संबंधित योजनाओं के कार्यान्वयन की जांच करना है.
 इसमें कार्यों को दो वर्गों में बांटा जाता है 
1 लागत लेखांकन की जांच 
2 लागत लेखों की प्रणाली की जांच

आंतरिक अंकेक्षण 


इसके अंतर्गत संस्था के अंकेक्षण का कार्य संस्था के ही कर्मचारियों के द्वारा किया जाता है .आंतरिक अंकेक्षण को निजी अंकेक्षण भी कहा जाता है .वर्तमान में बड़ी-बड़ी कंपनियां चार्टर्ड अकाउंटेंट को कर्मचारी के रूप में नियुक्त कर आंतरिक अंकेक्षण करवाती है. इसमें अंकेक्षक अपना प्रतिवेदन नहीं देता बल्कि संस्था के मालिक को या प्रबंधक को अपना सुझाव देता है.

 बाहरी अंकेक्षण


इसके अंतर्गत संस्था अपने लेखा पुस्तकों की जांच एक स्वतंत्र और निष्पक्ष अंकेक्षक द्वारा करवाती है .यह एक चार्टर्ड अकाउंटेंट होता है. इस अंकेक्षण का मुख्य उद्देश्य संस्था के लेखा पुस्तकों का सत्यापन होता है. उनका प्रमाणन होता है और संस्था का प्रतिवेदन तैयार करना होता है. इस प्रकार के अंकेक्षण में अंकेक्षक का संस्था से किसी प्रकार का कोई व्यक्तिगत संबंध नहीं होता है .वह नियोक्ता द्वारा एक निश्चित पारिश्रमिक के प्रतिफल स्वरूप अंकेक्षण का कार्य करता है.

Business Environment

व्यावसायिक वातावरण की परिभाषा

व्यावसायिक वातावरण दो शब्दों से मिलकर बना है व्यवसाय और वातावरण

 व्यवसाय 

ऐसे आर्थिक क्रियाकलाप जो लाभ के उद्देश्य से किए जाते हैं व्यवसाय कहलाते हैं.

आर्थिक क्रियाकलाप 

किसी वस्तु अथवा सेवा के उत्पादन, वितरण, विनिमय और उपभोग से संबंधित क्रियाएं सम्मिलित रूप से आर्थिक क्रियाकलाप कहलाते हैं.

आर्थिक क्रियाकलाप को मुद्रा के रूप में मापा जाता है. 

पर्यावरण 

हमारे आसपास के भौतिक और जैविक घटक जो हमें प्रभावित करते हैं सम्मिलित रूप से वातावरण का निर्माण करते हैं पर्यावरण कहलाते हैं.

व्यावसायिक वातावरण के घटक 

जैविक घटक और अजैविक घटक

जैविक घटक 
जीव जंतु वनस्पतियां 

अजैविक घटक 
मौसम जलवायु भौगोलिक स्थिति तापमान 

व्यावसायिक वातावरण 
ऐसे जैव और अजैव घटक जो व्यवस्था को प्रभावित करते हैं जिनके द्वारा व्यवसाय का अस्तित्व होता है व्यावसायिक पर्यावरण कहलाते हैं.
पर्यावरण की परिभाषा कुछ विद्वानों द्वारा इस प्रकार दी गई है 

Robbinsके अनुसार 

पर्यावरण से तात्पर्य उन कारकों से है जो संगठन के कार्य को प्रभावित करते हैं और जिन पर संगठन का बहुत कम नियंत्रण होता है.

Jauch और Glucck के अनुसार 

वे बाह्क घटक जो सम्मिलित रूप से किसी व्यवसाय के लिए अवसर और चुनौतियां पैदा करते हैं पर्यावरण कहलाते हैं . इन बाह्य घटकों में सामाजिक आर्थिक राजनीतिक और तकनीकी घटक सम्मिलित होते हैं.

 इस प्रकार पर्यावरण किसी संस्था की बाहर की वह शक्तियां होती हैं जो उनकी कार्यकुशलता और की सफलता को प्रभावित करती हैं और उन शक्तियों पर संस्था का कोई नियंत्रण नहीं होता है.

व्यवसायिक पर्यावरण की विशेषताएं

1पर्यावरण जैव और अजैव घटकों का मिश्रण होता है.
2 पर्यावरण गतिशील होता है 
3 पर्यावरण और व्यवसाय एक दूसरे पर निर्भर करते हैं.
4 पर्यावरण के बाय घटक अनियंत्रित होते हैं. 
5 पर्यावरण व्यवसाय के समक्ष विभिन्न चुनौतियां और अवसर रखता है

उद्यमिता

  उद्यमिता  की परिभाषा उद्यमिता से आशय उद्यमी द्वारा किए जाने वाले  कार्यों  से है जिसमें उद्यमी किसी नए व्यवसाय को स्थापित करने से संबंधित ...