औद्योगिक इकाइयों का स्थानीयकरण

औद्योगिक इकाइयों के स्थानीयकरण का अर्थ 
एक उद्यम के स्थानीयकरण से आशय औद्योगिक इकाइयों के किसी विशेष स्थान अथवा क्षेत्र की ओर आकर्षित एवं केंद्रित होने से है। यह वह स्थान या क्षेत्र है जहां पर औद्योगिक उत्पादन के विभिन्न साधन सुलभता से उपलब्ध होते हैं। उदाहरण के लिए भारत का सूती वस्त्र उद्योग मुंबई और अहमदाबाद में ही केंद्रित है क्योंकि वहां पर अन्य क्षेत्रों की अपेक्षा सूती वस्त्र उत्पादन के विभिन्न साधन प्रचुर मात्रा में उपलब्ध होते हैं।
एक उद्यम के स्थानीयकरण की परिभाषा

प्रोफ़ेसर डी एच रॉबर्टसन के अनुसार
"विशेष क्षेत्र के उद्योगों के आकर्षित होने केंद्रित होने तथा पनपने की प्रवृत्ति को ही एक उद्यम का स्थानीयकरण करते हैं ।" 

डॉक्टर पीएस लोकनाथन के अनुसार 
"एक उद्यम के स्थानीयकरण से अभिप्राय विभिन्न क्षेत्रों में उद्योगों के केंद्रीय करण से है जो अंतरराष्ट्रीय पहलू से क्षेत्रीय श्रम विभाजन का लाता है।"
 प्रोफेसर सुबीन के अनुसार " आदर्श उद्यम का स्थानीयकरण वही है जो वस्तु या सेवा के उत्पादन एवं वितरण की न्यूनतम प्रतीक आई लागत को संभव बनाता है" 

एस्प्रिनगरल एवं लेंस वर्ग के अनुसार "एक उद्यम का स्थानीयकरण प्राय: विरोधी सामाजिक ,आर्थिक, सरकारी एवं भौगोलिक कारणों के बीच तालमेल का परिणाम है।

 निष्कर्ष 

किसी क्षेत्र अथवा स्थान विशेष पर उद्योगों के आकर्षित होने ,केंद्रित होने एवं बढ़ते जाने की प्रवृत्ति को एक उद्यम का स्थानीयकरण कहते हैं।
एक उद्योग को प्रभावित करने वाले दो घटक प्राथमिक घटक और गौंण घटक होते हैं ।

प्राथमिक घटक 

इसमें उद्योगों के प्रादेशिक अथवा क्षेत्रीय वितरण प्रभाव डालते हैं इन्हें प्रादेशिक कारण भी कहा जाता है। इसमें कच्चे माल की आपूर्ति ,बाजारों से उद्योग की निकटता, श्रम की उपलब्धता, शक्ति स्रोतों की उपलब्धता यातायात और संदेश वाहन के साधनों की निकटता, वित्त की उपलब्धता आते हैं।

गौण कारण या घटक 

यह वे घटक होते हैं जो कि उद्योगों के पुन: वितरण पर केंद्रीकरण एवं विकेंद्रीकरण कृतियों द्वारा प्रभाव डालते हैं। इसके अंतर्गत राजकीय नियम, प्राकृतिक साधन और जलवायु संबंधी सुविधाएं ,प्रतियोगी उद्योग, पूरक उद्योग और व्यक्तिगत घटक शामिल होते हैं। यहां पूरक उद्योग का अर्थ है ऐसे उद्योग जिन पर मुख्य उद्योग अपने सामग्री के लिए निर्भर करता है।

उद्योग के स्थानीयकरण के महत्त्व या लाभ 

1 पूंजी विनियोग में कमी 
उद्योग का स्थान निर्धारण पूंजी  के विनियोग में पर्याप्त कमी करता है क्योंकि कच्चे माल की आपूर्ति और ईंधन की आपूर्ति कम लागत पर ही उस स्थान पर प्राप्त हो जाती है.
 
2 साधनों का अनुकूलतम उपयोग 
आदर्श स्थान निर्धारित होने पर साधनों का अनुकूलतम उपयोग संभव हो जाता है.

3 संचालन व्यय में कमी 
उद्योग की स्थापना से कच्चा माल, परिवहन, श्रम ,इंधन उपकरण, मरम्मत ,सामग्री आदि की सुविधा समीप ही उपलब्ध हो जाती है. परिणास्वरूप संचालन व्यय में कमी आती है.
 
4 लाभ में वृद्धि 
सभी प्रकार की लागतो में कमी और कुशल उत्पादन के कारण प्रति इकाई लागत में कमी आती है जिससे लाभ की मात्रा में वृद्धि होने की संभावना रहती है.
 
5श्रम की उपलब्धता 
एक उद्योग के स्थानीयकरण में कुशल श्रम की उपलब्धता का महत्वपूर्ण स्थान होता है दूर-दूर के श्रमिक ऐसे स्थानों पर आकर्षित होते हैं ।

6 अनुसंधान सुविधाओं का विकास 
कोई उद्योग जब एक ही स्थान पर स्थापित होते हैं तो यह मिलकर संयुक्त रूप से अनुसंधानसाला की स्थापना कर लेते हैं जहां औद्योगिक अनुसंधान में कमी हो जाती है।
 
7 संतुलित क्षेत्रीय विकास 
औद्योगिक स्थान सरकारी नीतियों के अनुरूप होने पर देश में संतुलिविकास को बल मिलता है और पिछड़े क्षेत्रों में विकास होता है । उद्योग के एक ही स्थान पर स्थापित हो जाने से उस स्थान की ख्याति बढ़ जाती है ।उद्योग के नाम से माल का विक्रय होने लगता है ।जैसे अलीगढ़ के ताले,आगरा के चमड़े के जूते इत्यादि 

8 सुरक्षा में वृद्धि 
आदर्श स्थान होने पर वहां बाढ़ ,अग्नि, विदेशी ,आक्रमण चोरी, डकैती आदि से सुरक्षा की पर्याप्त व्यवस्था की जाती है। यहां बीमा कंपनियां भी उन्हें बीमा की सुरक्षा प्रदान करती है।

Approaches of selling process

 विक्रय प्रक्रिया के अंतर्गत विक्रय कर्ता द्वारा अपने ग्राहकों के लिए विभिन्न प्रकार के विक्रय दृष्टिकोण को अपनाना पड़ता है क्योंकि ग्राहकों की मनोंृतया ,स्वभाव, आय, रहन सहन सभी चीजों को विक्रय कर्ता  द्वारा ध्यान में रखना आवश्यक होता है। इनको देखते हुए हम पांच प्रकार के विक्रय दृष्टिकोण को अपना सकते हैं ।

1 मित्र दृष्टिकोण 

इस दृष्टिकोण के अंतर्गत संगठनात्मक संरचना में विपणन गतिविधियो में सहायता करने के लिए कम से कम 2 लोगों को एक साथ रखा जाता है जिनमें मैत्रीपूर्ण संबंध होते हैं और यह विपणन के काम को आसान बना देते हैं।

 इसमें यह धारणा भी शामिल होती है कि कोई भी व्यक्ति अपने करीबी दोस्त के साथ ही व्यापारिक संबंध बनाना चाहता है जिसके बारे में वह व्यक्तिगत रूप से जानता है । संबंधों में किसी प्रकार का दिखावा हो तो यह विपणन कार्य में बाधक होता है । एक और चीज स्पष्ट करना अनिवार्य है कि विपणन कर्ता यदि व्यक्तिगत रूप से ग्राहकों के साथ संपर्क करता है तो उसमें मैत्रीपूर्ण आत्मीयता की भावना का होना अनिवार्य है ।

2 समाधान दृष्टिकोण 

इसके अंतर्गत विक्रय करता को ध्यान से ग्राहकों को सुनना होता है उससे कुछ प्रश्नों के द्वारा उसकी आवश्यकता ओं को जानने का प्रयास किया जाता है और फिर ग्राहक को वस्तु क्रय करने के लिए सलाह दिया जाता है ।

यदि मुझे भारतीय अर्थव्यवस्था के पुस्तक की आवश्यकता है और किताब विक्रेता द्वारा पुस्तक के लेखक के नाम और प्रकाशन के बारे में पूछे जाने पर मैं नहीं बता पाता तो पुस्तक विक्रेता द्वारा यह पूछना कि किस उद्देश्य से आप पुस्तक खरीदना चाहते हैं ,मैं उसे बताता हूं । वह मुझे सिविल सर्विसेस की किताब खरीदने की सलाह देता है।मेरे द्वारा वह पुस्तक खरीद ली जाती है उसे पढ़ने के साथ ही उस पुस्तक की भाषा और लेखन शैली मुझे काफी प्रभावित करती है इस प्रकार मेरे सामने जो पुस्तक ख़रीद को लेकर समस्याएं उत्पन्न हुई थी उसे विक्रय करता द्वारा काफी अच्छे तरीके से समाधान किया गया। 

3 गुरु दृष्टिकोण 

इसके अंतर्गत आप अपने को एक विश्लेषक और तार्किक व्यक्ति के रूप में लोगों के सामने प्रस्तुत कर सकते हैं जिसमें बौद्धिक क्षमता के द्वारा समस्याओं के समाधान करने और सलाहकार की भूमिका निभाने की क्षमता होती है । इस प्रकार के दृष्टिकोण रखने वाला सेल्सपर्सन एक मोटीवेटर के रूप में अपना काम करता है और बहुत सारे रेफरल बनाता है जो इसे फॉलो करते हैं । 

इसके अलावा एक सेल्सपर्सन अपने क्षेत्र का अच्छा जानकार होता है जिसे अपने क्षेत्र के विभिन्न चुनौतियां का सामना करने का अच्छा अनुभव होता है।

4 परामर्शदात्री बिक्री दृष्टिकोण

सामान्यतः तकनीकी से संबंधित विक्रय के लिए इसका विशेष महत्व होता है ।इसमें विक्रय कर्ता अपने ग्राहकों के साथ मित्रता और विश्वसनीयता के संबंध स्थापित करता है। अपनी समझ ज्ञान और अनुभव द्वारा वह ग्राहकों के समस्याओं का विश्लेषण कर उसे उचित परामर्श देता है। 

5 ग्राहक  व्यक्तित्व दृष्टिकोण 

इसके अंतर्गत एक विक्रय कर्ता खरीदार के प्रकार के अनुसार अपने विक्रय दृष्टिकोण को अपनाता है | पहले वह खरीदार को परखता है उसके बाद वह विक्रय के उस तरीके को अपनाता है जो उसे अधिक प्रभावित कर सकता है | 

मान लीजिए ए और बी दो मित्र हैं | ए पेशे से एक साइकल विक्रय कर्ता है जबकि बी एक शिक्षक है | ए द्वारा बी को साइकिल खरीदने की सलाह दी गई। ए ने साइकिल खरीदने के लिए बी पर जोर नहीं दिया और ना ही उससे सहमति लेने का भी प्रयास किया । ए ने तुरंत हां ना करके 4 दिन पश्चात साइकिल लेने की इच्छा जाहिर की । ए साइकिल का एक विक्रय कर्ता था इसीलिए उसने बी को साइकिल बेच दी।

 यहां यह ध्यान देने वाली बात है कि ए का बी के साथ घनिष्ठ संबंध था इसलिए वह एक पेशेवर के रूप में बी को साइकिल नहीं भेज सकता था ।

बी द्वारा इस बात की पुष्टि कर ली जाती है उन4 दिनों में कि ए द्वारा उसे उचित सलाह दिया गया है। इसलिए वह बी से ही साइकिल खरीदने की अपनी इच्छा जाहिर करता है। 

इस प्रकार उपरोक्त विक्रय दृष्टि को ध्यान में रखकर एक विक्रय कर्ता  विपणन में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

selling process विक्रय प्रक्रिया

: विक्रय प्रक्रिया विपणन के अंतर्गत जो सम्मिलित क्रियाएं होती हैं इसका एक भाग है जो व्यवसाय में निरंतर चलता रहता है। इसमें संभावित ग्राहकों की पहचान से लेकर के ग्राहकों की संतुष्टि तक के समस्त कार्य को सम्मिलित किया जाता है। विक्रय प्रक्रिया  के निम्न चरण हैं 
1 पूर्वेक्षण करना 
2 पूर्व पहुंच 
3 रीच एवं प्रस्तुतिकरण 
4अभिनय 
5 समाप्ति समाप्ति
6 व्यसनों का उपचार 
7 समाप्ति या समाप्ति और 
8 अनुगमन

1 पूर्वेक्षण करना
अव्यवस्थित प्रक्रिया की यह सबसे पहली अवस्था है। इसमें यह दर्शाया गया है कि उस वस्तु की आवश्यकता वाले शब्द और संकेत हैं। इसका कारण यह है कि बिना आवश्यकता वाले या अयोग्य लोगों की ओर से अधिक प्रयास करने से बिक्री में वृद्धि नहीं होती है, विक्रेता का समय और परिश्रम कम हो जाता है और कोई आर्थिक लाभ भी नहीं होता है।

2 पूर्व पहुंच
जब वैराइटी को भावी वियेंटल का पता लगता है तो वैराइटी क्रिया की दूसरी अवस्था पूर्व पहुंच की आ जाती है। इससे क्रेता के संबंध में सामान्यता उसकी आयु, आयु, परिवार, मैत्री संबंध, रुचि में सभी की मित्रता का संबंध होता है। ऐसे साक्षात्कार से बातचीत करने वाला व्यक्ति इन साड़ियों में समय का विशेष ध्यान रखता है। उदाहरण के लिए अगर ग्राहक ने लिखा है तो बिना पढ़े ग्राहक की तुलना में कुछ और प्रकार का होगा। इसी प्रकार यदि एक तकनीकी ज्ञान वाला ग्राहक होगा तो उसके साथ व्यावसायीकरणकर्ता का व्यवहार दूसरा होगा।

3 रीच एवं प्रस्तुतिकरण
क्रेटा का पता लगाएं और उसके बारे में जानकारी प्राप्त करें इस बात की आवश्यकता है कि उस तक पहुंच जाए और वस्तु को प्रस्तुत किया जाए क्रेता तक पहुंच के कई तरीकों से संदर्भ शामिल है पहुंच, परिचय पहुंच, वास्तु पहुंच और उपभोक्ता लाभ पहुंच। 
संदर्भ रीच के अंतर्गत उपयोगकर्ता पुराने ग्राहक का कोई यह पत्र नोट ग्रह का नाम से लिखा है और फिर से लेकर वह ग्राहक के पास जाता है तो ऐसी रीच प्रसंग रीच कहलाती है 
पूर्व परिचय रीच 
जब कोई पत्र नहीं होता है तो वह इस तरीके को अपनाता है। इसमें ग्राहक का रेटिंग कर अपना परिचय दिया गया है और बताया गया है कि उसका नाम क्या है, वह किस कंपनी में काम करता है और किस सामान के लिए वह उसके पास आया है।
वस्तु पहुंच 
इसमें ग्राहक के पास की वैरायटी अपनी वस्तु को सामने रख देती है जिससे ग्राहक को उसके वैयक्तिक पात्र की भावना समझ में आ जाती है। 
उपभोक्ता लाभ पहुंच 
यह विधि आम तौर पर सामानों पर आधारित होती है। वस्तु से उपभोक्ता को क्या लाभ होता है इसकी जानकारी विक्रेता द्वारा उपभोक्ता को दी जाती है और उसे इसमें अपनी ओर आकर्षित करने का प्रयास किया जाता है।

4
इसमें ग्राहक के संयोजन के रूप में एक नाटक का प्रदर्शन किया जाता है जिससे कि ग्राहक अपनी दृष्टि से प्रभावित हो और वस्तु को विखंडित करने के लिए लालायित हो जैसे कि जीवन बीमा का उद्देश्य जोखिम को सहन करना है जबकि बीमा धारक बीमाधारक ऐसा नहीं सोचता है। वह तो अपने आप को निश्चित काल तक जीवित रहने की बात करता है। वैसे ही समय बीमा कलाकार नाटक अपना खेलता है और अपने थैले में कुछ पत्रों के बारे में बताता है और बताता है कि नवयुवक की मृत्यु में मृत्यु किस प्रकार उसके परिवार को अंधेरे में डाल देती है यदि इस छात्र ने अपना जीवन बीमा करा लिया हो
तो परिवार वालों को इतना धन मिल जाता है कि वे अपने जीवन के रूप में काम कर सकते हैं।

5 समाप्ति समाप्ति
 जब विक्रेता ने अपनी बात का भुगतान कर दिया है और वस्तु का प्रदर्शन भी कर दिया है तो उसे अब इस बात का पता चल गया है कि ग्राहक ने वस्तु के बारे में निर्णय लिया है या नहीं। कुछ ग्राहक ऐसे होते हैं जिनका विषय-वस्तु में पता नहीं चलता क्योंकि वह उस वस्तु पर अपनी प्रतिक्रिया नहीं देते। ऐसी स्थिति में वैराइटी कलाकारों को ऐसे प्रश्न करने के लिए कहा जाता है, जिससे पता चलता है कि ग्राहक ने इसे तैयार किया है या नहीं। आपको कौन सा मॉडल पसंद है? आपको किस रंग को पसंद आएगा? आपके लिए किचन पैक कर दूं आदि।
6 व्यसनों का उपचार
 जब ग्राहक वस्तु को विक्रीटेड करने की स्थिति में नहीं होता या वस्तु पसंद नहीं आती तो वह विभिन्न प्रकार की व्यग्रताएं उठाता है। एक एवं अच्छे कुशल विचक्षण कलाकारों को क्रीड़ाओं से डरना नहीं चाहिए बल्कि अपने शिष्ट कला का प्रदर्शन करने वाले इन चरित्रों को दूर करने में ऐसा करना चाहिए जिससे कि ग्राहक नैतिक दृष्टि से दब जाए और क्रीड़ा करने का आदेश दे दे।

7 समाप्ति या समापन 
एक व्युत्पत्ति द्वारा ग्राहक का पता तब तक चलाया जाता है जब तक कि ग्राहक वस्तु को ग्राहकों की सुरक्षा के लिए पेश न कर दे।

8 अनुगमन
समाप्ति तिथि के अंत में इस बात की आवश्यकता होती है कि ग्राहक का अनुगमन किया जाए। अनुगमन में विभिन्न विशेषताएँ शामिल हैं जिनमें दो प्रमुख हैं एक ग्राहक को वस्तु उसके ऑर्डर के अनुसार मिल जाएगी और दो ग्राहक रहेंगे तो भविष्य में ऑर्डर मिलने की संभावना बनी रहेगी। समय-समय पर ऑनलाइन बिक्री नीति के तहत ऐसा किया जाता है कि ग्राहकों से दूसरे ग्राहकों की ओर से आकर्षित नहीं किया जाता है और गैर-लाभकारी ग्राहकों से ग्राहक हो जाते हैं।


विपणन से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्न

1 विपणन की अवधारणा है 
a उत्पादनमुखी  b विक्रयुनमुखी c ग्रहकोंमुखी 
d विक्रेतामुखी
Ans c
विपणन अवधारणा ग्राहक मुखी है

2 विपणन जीवन स्तर प्रदान करता है यह परिभाषा दी गई है 
a हेसन b पआॅलमजुर c विलियम जे स्टांटन 
d कोटलर
Ans c
Paul Mazor ने अपनी परिभाषा में कहा है कि विपणन जीवन स्तर प्रदान करता है।यह व्यक्ति के जीवन स्तर में सुधार लाता है जो पहले की स्थिति से और बेहतर वस्तु या सेवा के उपयोग से संभव है।

3 फर्म अधिक निराशाजनक स्थिति में बाजार में अपना हिस्सा बेचने के लिए साधनों तथा तरीकों को अपनाती है 
a उत्पाद जीवन चक्र का विकास स्तर
b उत्पाद जीवन चक्र का घटता स्तर
c परिपक्वता का स्तर
d सभी
Ans b
परिपक्वता बिंदु के बाद फार्म उत्पाद की मांग में बढ़ोतरी नहीं होती है और बाजार हिस्सेदारी कम होने लगती है।

4 विपणन एक प्रक्रिया है जो उत्पादन के....... प्रारंभ होती है
a पूर्ण b तत्काल पश्चात c साथ साथ d बाद में
Ans a
विपणन एक प्रक्रिया है जो वस्तु के उत्पादन से पहले ही प्रारंभ होता है बाजार मांग के पहले ही इसकी शुरूआत होती है।

5 निरक्षर उपभोक्ता के लिए कौन सा माध्यम उपयोगी है
a प्रकाशन मीडिया b प्रसारण मीडिया c पोस्टर 
d पारगमन साधन
Ans b
प्रसारण मीडिया के माध्यम से समाचार संदेश और सूचना अविलंब एक साथ करोड़ों लोगों के पास पहुंच जाते हैं।

6 विपणन के निकट दृष्टि की अवधारणा दी गई थी 
a ई डब्ल्यू इमर्शन द्वारा b पीटर एफ ड्रकर द्वारा 
c फिलिप कोटलर द्वारा  d थियोडोर लेबिट द्वारा
Ans d
विपणन की निकट दृष्टि की अवाघरना लेबिट द्वारा 1960में दी गई। इस अवधारणा के अनुसार यह एक ऐसी स्थिति होती है जब कंपनी के पास एक संकीर्ण सोच वाला विपणन दृष्टिकोण होता है और यह मुख्य रूप से कई संभावित विपणन विस्तृत विशेषताओं में से किसी एक पहलू पर ही केंद्रित होता है। उदाहरण के लिए केवल एक गुणवत्ता पर ध्यान केंद्रित करना और ग्राहक की वास्तविक मांग पर ध्यान ना देना मार्केटिंग मायोपिया से संबंधित है।

7 मलाई उतार मूल्य नीति लागू होती है 
a विलासिता की वस्तुओं पर b उपभोग की वस्तुओं पर c आवश्यक वस्तुओं पर    d औद्योगिक वस्तुओं पर
Ans a
मलाई उतार मूल्य नीति विलासिता की वस्तुओं के लिए उपयोगी तथा लाभदायक होती है। इन वस्तुओं की कीमत सामान्य वस्तुओं की तुलना में अधिक रखी जाती है। इसे ही भलाई उतार मूल्य नीति करते हैं। इस युक्ति का प्रयोग उन क्षेत्रों में अधिक लाभ कमाने के उद्देश्य से किया जाता है जहां लोग उस वस्तु के लिए आसानी से भुगतान करने को तैयार होते हैं और वस्तु का विकल्प भी नहीं होता है।
8 निम्नलिखत में कौन वारंटी से वारंटी कौन से संंबंधीत है
a यह संविदा को पूर्ण करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है b यदि कोई उल्लंघन होता है तो पीड़ित संविदा को भंग कर सकता है 
c यह संविदा के मुख्य उद्देश्य के लिए अनिवार्य है 
dयदि उल्लंघन होता है तो पीड़ित पक्ष केवल क्षतीयों की पूर्ति के लिए दावा कर सकता है
Ans d
वारंटी के संबंध में यह उल्लेखनीय है कि यदि आपसी समझौते के मध्य कोई उल्लंघन होता है या क्षति होती है तो पीड़ित पक्ष कार केवल क्षत्रियों की पूर्ति के लिए दावा कर सकता है।

9 बाजार संचार तंत्र योजना के निम्नलिखित चार चरण हैं इन चारों को सही क्रम में व्यवस्थित कीजिए 
A बिक्री भविष्यवाणी में वेयरहाउस प्रबंधन परिवहन और सामग्री प्रबंधन में सक्रिआत्मक उत्कृष्टता विकसित करना 
B ग्राहकों तक पहुंचने के लिए सर्वोत्तम चैनल डिजाइन और नेटवर्क कार्य नीति का चयन करना 
C सर्वोत्तम सूचना प्रणाली उपस्कर नीतियों और प्रक्रियाओं के साथ समाधान को लागू करना
D अपने ग्राहकों के प्रति कंपनी की मूल्य प्रस्तावना पर निर्णय करना
सही विकल्प का चयन करें
a)ABCD  b)DBAC  C )DBCA   d)DCBA
Ans b.

10 विपणन में संचार माध्यम और उसके संचार प्लेटफार्म को सुमेलित करें
 a विज्ञापन           १ब्लॉग 
  b सेल्स प्रमोशन।  २ब्रोशर एवं बुकलेट्स
  c वर्ड ऑफ माउथ  ३सेल्स मीटिंग 
  d व्यक्तिगत विक्रय   ४ प्रतियोगिताएं
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही विकल्प चुने
a) A  २   B  ३  C ५    D१  b) A२   B४   C१    D३
c) A ४    B३    C२    D१    d) A४   B३   C१    D२
Ans b.













salesmanship (विक्रय कौशल/ विक्रय कला)

परिचय 
सामान्यतः विक्रय कौशल और व्यक्तिगत विक्रय दोनों को एक ही समझा जाता है लेकिन इसमें अंतर है. व्यक्तिगत विक्रय एक व्यापक अवधारणा है जिसमें विक्रय कौशल शामिल होता है .

व्यक्तिगत विक्रय में वस्तु का मूल्य निर्धारण, विज्ञापन, वस्तु विकास और अनुसंधान, वितरण चैनल और भौतिक वितरण जैसे तत्व सम्मिलित होते हैं.

 विक्रय कला व्यक्तिगत विक्रय के अंतर्गत उपयोग की जानेवाली एक गतिविधी है.

इसकी परिभाषा विभिन्न विद्वानों ने इस प्रकार दी है 

नॉक्स के अनुसार ,
*विक्रय कला लोगों को क्रय करने के लिए प्रभावित करने की शक्ति है.
 *यह लोगों को समझाने की क्षमता है कि उन्हें पहले से ही इस वस्तु की आवश्यकता है.

 प्रोफेसर स्टीफेंसन के अनुसार 
*विक्रय कला संभावित खरीदार को कुछ प्रयोग करने के लिए प्रेरित करने का सचेत प्रयास है.
* विक्रय के लिए जो वस्तु या सेवा है उसे खरीदने के लिए राजी करना भी विक्रय कला के अंतर्गत शामिल है. 

हॉट क्लॉक के अनुसार 
विक्रय कला लोगों को आनंद पूर्वक और स्थाई रूप से उत्पाद को खरीदने के लिए राजी करने से संबंधित है ताकि लाभ प्राप्त किया जा सके.

 जेसी जगसिया के अनुसार
 विक्रय कला किसी वस्तु की उपयोगिता से संबंधित संदेह, अज्ञानता और आपत्ति को दूर करने की क्षमता है.
निष्कर्ष
 विक्रय कला लोगों को उत्पादों के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ उनकी आवश्यकता की पूर्ति करने हेतु या उनकी आवश्यकता उत्पन्न करने हेतु उत्प्रेरित करने की दक्षता है जिसे विक्रय करता द्वारा प्रयोग में लाया जाता है.
वर्तमान समय में विक्रय कला की अवधारणा 

पुरानी धारणा के अनुसार विक्रय कला जैसे शब्दों से कोई लेना-देना नहीं था. विक्रेता का काम माल के आर्डर लेना और क्रेता  को माल दिखाना तथा अगले ऑर्डर की प्रतीक्षा करना ही शामिल था.
  समय के साथ परिवर्तन हुआ प्रतिस्पर्धा बढ़ने से विक्रय कर्ता को अपने विक्रय कौशल पर ध्यान देना आवश्यक हो गया. आज सेल्समैन क्रेता  के लिए जरूरतों को पैदा करते हैं. उन्हें इस बात का भरोसा दिलाते हैं कि वस्तु किस प्रकार से क्रेता की आवश्यकता की पूर्ति कर सकती है. 
आज विक्रय कला एक रचनात्मक कार्य हो गया है जिसमें ग्राहक को वस्तु की आवश्यकता पैदा करने से लेकर ग्राहक संतुष्टि तक पर ध्यान दिया जाता है. इसमें खरीदार और विक्रेता दोनों के लिए पारस्परिक लाभ को ध्यान में रखा जाता है.
salesman के कर्तव्य 
*वस्तुओं एवं सेवाओं की बिक्री करना
*बिक्री से संबंधित प्रमाणों को संग्रह करना
* सभी शिकायत कर्ताओं को संतुष्ट करना
*बिक्री बैठकों में भाग लेना 
*उत्पाद की बिक्री में आने वाली समस्याओं को हल करना
*ग्राहकों के साथ अच्छे संबंध बनाना
विक्रय कला का महत्व 
वर्तमान समय में विक्रय कला की महत्वपूर्ण भूमिका है. बढ़ते बाजार प्रतिस्पर्धा के चलते उत्पादों की बाजार में कमी नहीं है कमी है तो अच्छे सेल्समैन की.
 कहने का तात्पर्य है कि बाजार में उपलब्ध उत्पादों की कमी नहीं है उत्पादों के विक्रय को लेकर प्रतिस्पर्धा बनी रहती है. विक्रय कला जितनी शानदार होगी उस वस्तु की मांग उतनी ही ज्यादा होगी. विक्रय कला द्वारा जहां कमजोर उत्पाद के लिए बाजार मांग पैदा किया जाता है वहीं दूसरी ओर विक्रय कला के अभाव में अच्छे किस्म के उत्पाद का बाजार मांग का अभाव होता है.
1 उत्पादकों के लिए विक्रय कला का महत्व
विक्रय कला उत्पादक के लिए आंख और कान के रूप में काम करते हैं.
प्रतिस्पर्धी बाजार में उत्पादों के लिए मांग पैदा करना,  नए बाजार की खोज करना ,उपभोक्ताओं के बारे में उत्पादकों को जानकारी देना, उपभोक्ता के अनुरूप वस्तुओं के गुणवत्ता में सुधार करना, बाजार मांग  आंकड़ों की जानकारी इकट्ठा कर संबंधित जानकारी उत्पादकों को विक्रय करता प्रदान करता है जिससे विक्रय नीतियों में बदलाव किया जा सके.
2 उपभोक्ताओं के लिए विक्रय कला का महत्व
विक्रय कला द्वारा उपभोक्ताओं को वस्तुओं के बारे में जानकारी होती है. उपभोक्ताओं का मार्गदर्शन होता है. 
उपभोक्ता बाजार के राजा की तरह होता है इसलिए ज्यादा से ज्यादा अहमियत उपभोक्ता संतुष्टि को दिया जाता है. इसलिए सेल्समैन उपभोक्ता को उत्पादों को सही वस्तुओं से संबंधित निर्णय लेने में मदद करते हैं और वस्तु क्रय करने में भी मदद करते हैं.
इस प्रकार बिना आर्थिक क्रियाकलाप रुकावट के बाजार का काम निर्बाध रूप से चलता रहता है.
विक्रय कला के क्षेत्र
 बढ़ते औद्योगीकरण के चलते बाजार में उत्पाद बढ़ते जा रहे हैं.प्रतिस्पर्धा और बाजार मांग के बीच उत्पादकों को अपने अस्तित्व को बनाए रखने के लिए विक्रय कला पर ज्यादा फोकस करना पड़ रहा है. विक्रय के नए-नए तरीके का उपयोग होना विक्रय कला के क्षेत्र को और ज्यादा विस्तारित करता है. 
वर्तमान तकनीकी और सूचना प्रौद्योगिकी ने इसका दायरा बढ़ा दिया है. आज वही उत्पाद बाजार में मौजूद रह सकते हैं जिन्हें विक्रय कला द्वारा उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जा रहा है .
विक्रय कला का क्षेत्र अब पहले की तुलना में काफी व्यापक हो चुका है. इसमें परिवहन,शिक्षा, बैंकिंग, पेंटिंग, चिकित्सा, बीमा, कानून जैसे कई चीजें शामिल है. विक्रय कला के अंतर्गत उत्पादों का ज्ञान उसके प्रयोग के तरीके, ग्राहकों के व्यवहार का अध्ययन, प्रबंध और संगठन के विषय वस्तु को शामिल किया जाता है. विज्ञापन द्वारा वस्तुओं का प्रचार भी इसमें शामिल होता है. इन सब का प्रयोग करते हुए विक्रयकर्ता वस्तुओं और सेवाओं की जानकारी उपभोक्ताओं तक पहुंचाता है.

 विक्रय कला की उपयोगिता 

1 उत्पादकों के लिए 

विक्रय कला उत्पादकों के लिए उनके अस्तित्व से जुड़ा होता है. विक्रय कला के द्वारा ही वह अपनी वस्तुओं के मांग का सृजन करते हैं और उत्पादों की आपूर्ति उसी पर निर्भर करती है.

 2 समाज के लिए 

समाज की आवश्यकता दिन-प्रतिदिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही हैं. नए उत्पादों के मांग और उनका सृजन सामाजिक दायरे के अंतर्गत होता है जिन पर उत्पादकों की नजर होती है और उन्हीं सामाजिक हितों को ध्यान में रखते हुए विक्रय कला के विभिन्न विधियों का प्रयोग किया जाता है.

 3 सरकार के लिए 

विपणन बाजार के आधार पर नए उभरते विकासशील देशों में विपणन का महत्वपूर्ण योगदान है . खासकर विक्रय कला को लेकर बाजार में वस्तुओं में कड़ी प्रतिस्पर्धा होती है जिसका लाभ सरकार को करों के रूप में प्राप्त होता है .

4 विक्रयकर्ता के लिए 

विक्रय कर्ता के लिए यह काफी उपयोगी होता है. इस में वस्तुओं के विक्रय पर विक्रयकर्ता को वेतन के अतिरिक्त कमीशन भी प्राप्त होते हैं .विक्रय कर्ता एक बार विक्रय कौशल के हुनर का उपयोग कर ले तो इसे बार-बार और दक्षपूर्ण तरीके से अंजाम देता है.

 5 ग्राहकों के लिए

 ग्राहकों को विक्रय कला द्वारा विभिन्न वस्तुओं के प्रयोग की जानकारी होती है. ग्राहक अपनी आवश्यकतानुसार वस्तु का क्रय करते हैं.

6 दीर्घकालीन व्यवसायिक संबंधों को बनाने  के लिए

 विक्रय कला द्वारा विक्रय कर्ता है. व्यक्तिगत रूप से ग्राहकों से जुड़ जाता है जिससे दीर्घकालीन व्यवसायिक लाभ प्राप्त होते हैं 

7 उत्पादों के वितरण के लिए

वितरण के विभिन्न चैनलों में विक्रय कर्ता की महत्वपूर्ण भूमिका होती है.  थोक विक्रेता को या वितरक को यह ग्राहकों के बारे में जानकारी देते हैं और साथ ही विक्रय की रणनीति बनाने में भी आवश्यक सुझाव देते हैं.

 8 नवीकरण को प्रोत्साहन देने के लिए

 समाज को नई वस्तुओं से विक्रय कला द्वारा परिचित कराया जाता है.

Depositary System

निक्षेपागार प्रणाली 

 इस प्रणाली में जहां लिखित दस्तावेज रहित शेयर व्यापार और जी वविभएकीकृत( डिमॉनेटाइज्डम) प्रकार के प्रतिभूतियों की   के निपटान को आधुनिक तकनीकी द्वारा सक्षम बनाया जाता है । इस नए सिस्टम में कागजी काम का समापन, निपटाने का समय तथा तरलता में बढ़ोतरी पाई जाती है।

निक्षेपागार प्रणाली की रचना

1 निक्षेपागार  सहभागी

 2 लाभकारी निवेशक

 3 जारीकर्ता

 4 निक्षेपागार

1 निक्षेपागार सहभागी

यह निक्षेपागार का एजेंट होता है अगर कोई विनियोजन निक्षेपागार की सेवा लेना चाहता है तो उसे डीपी के यहां अपना अकाउंट खोलना पड़ता है . निक्षेप से संबंधित सभी कार्य निक्षेपागार  सहभागी द्वारा उसी अकाउंट के द्वारा किया जाता है .इस प्रकार  निक्षेपागार सहभागी, निवेशक के बीच कड़ी का काम करता है. 

निक्षेपागार सहभागी द्वारा इसके लिए एक डीमैट अकाउंट खोला जाता है. डिमैट अकाउंट खोलते समय  निक्षेपागारसहभागी और निवेशक के बीच एक ठहराव होता है ननिक्षेपागार सहभागी बैंक, वित्तीय संस्था, दलाल या अन्य गैर बैंकिंग वित्तीय संस्था हो सकते हैं. 

डीपी की सूची- 

केनरा बैंक,सिटीबैंक, डच्च बैंक ,  आईसीआईसीआई बैंक ,आईडीबीआई इत्यादि.

2 लाभकारी निवेशक 

यह व्यक्ति ही प्रतिभूति का वास्तविक स्वामी होता है जिसका नाम निक्षेपी यहां रिकॉर्ड होता है .वही प्रतिभूतियों के पासबुक एंट्री के रूप में जमा करवाता है उसके पास प्रतिभूति से संबंधित अधिकार व दायित्व होते हैं. 

3 जारीकर्ता

जारीकर्ता कंपनी प्रतिभूतियों को जारी करता है .यह प्रतिभूतियों के पंजीकृत मालिकों के नाम निक्षेपी आदि के रिकॉर्ड को रजिस्टर में बनाए रखता है. जारीकर्ता अंशधारियों की सूची जो निक्षेप से जुड़े हैं उन नियमों को भेजता है.

4 निक्षेपागार

यह एक फर्म है जहां पर बिन युवक की प्रतिभूतियों को इलेक्ट्रॉनिक रूप में होल्ड कर रखा जाता है .निक्षेपागार ग्राहकों के प्रतिभूतियों के रूप में कार्य करता है जिसका नाम रिकॉर्ड में प्रकाशित होता है. भारत में इस समय दो ननिक्षेपागार हैं

1 राष्ट्रीय प्रतिभूति निक्षेपागार और 

2 केंद्रीय प्रतिभूति सेवाएं लिमिटेड

1 राष्ट्रीय प्रतिभूति निक्षेपागार लिमिटेड 

National Security Depository Ltd

 भारत का पहला निक्षेपागार संगठन एनएसडीएल था जिसे आईडीबीआई ,यूटीआई और एनएसई ने प्रमोट किया इस के स्थापित करने का मुख्य उद्देश्य था कि पूंजी बाजार में प्रतिभूतियों का व्यापार इलेक्ट्रॉनिक रूप में किया जाए. 

निक्षेपागार से संबंधित नियम भारत सरकार द्वारा 1995 में बनाया गया और सेबी द्वारा 1996 में इस संदर्भ में दिशानिर्देश जारी किए गए. 

NSDL के कार्य 

1 यह डिपॉजिटरी के रूप में कार्य करता है अर्थात यह प्रशासनिक निकाय होते हैं जो प्रतिभूति ,वित्तीय साधनों और निवेश के शेयरों को डिमैटेरियलाइज्ड रूप में रखते हैं

 2 यह निवेशकों के लिए बैंक के तरह कार्य करता है .

3 यह सुविधाजनक इलेक्ट्रॉनिक रूप में स्टॉक बोनस और डिवेंचर के स्वामित्व की अनुमति देता है.

4 वित्तीय साधनों को भौतिक रूप में रखने में काफी जोखिम उत्पन्न होता है. यह संगठन इस समस्या से छुटकारा दिलाता है और मार्केट अधिग्रहण के भंडारण के लिए इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम प्रदान करता है 

5 यह डिपॉजिटरी सेवाओं में लेनदेन के लिए मदद करता है जिसके चलते इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग के  निवेश में काफी उछाल आ गया है.

 6 विशेष सेवा - इसमें कल्पित नगद का बांटना, स्कंद उधार, स्पीड तथा इंटरनेट आधारित डिमैट लेखा धारियों के लिए सेवा प्रदान करना शामिल है . 

केंद्रीय निक्षेपागार सेवाएं लिमिटेड 

Central Depository Services Ltd

सीडीएसएल द्वारा 1999 में अपना कार्य शुरू किया गया इसे बीएसए द्वारा प्रमोट किया गया अन्य बैंकों यथा एसबीआई एचडीएफसी यूपीआई आदि द्वारा भी इसे प्रमोट किया गया इसके स्थापना के पीछे का उद्देश्य था सभी भागीदारों को विश्वसनीय एवं सुरक्षित निक्षेपागार सेवा सही लागत पर मिल सके. 

सीडीएसएल के कार्य 

1 सीडीएसएल का नेटवर्क पूरे देश में फैला होने के कारण निवेशक अपने जरूरत के मुताबिक डी पी का चुनाव करता है.

2 सीडीएसएल डीपी की सेवाएं दे सकता है क्योंकि यह केंद्रीकृत डेटाबेस वास्तुशास्त्र पर आधारित है .

3 सीडीएसएल निम्नतम टैरिफ दरों को रखता है ताकि निवेशकों के लिए उचित निक्षेप आगार सेवाएं प्रदान की जा सके. 

4 डीमैट खाता धारक इंटरनेट पर अपने खातों तक पहुंच सकता है क्योंकि डीपीएस इंटरनेट उपयोग करने के लिए सीडीएसएल के साथ पंजीकृत होता है. 

5 कोई भी डीपी या एक निवेशक सीडीएसएल से स्पष्टीकरण और सहायता ले सकता है.

6 सीडीएसएल रिकार्डों को स्टोर करता है जो प्रतिनिधियों के स्वामित्व के बारे में बताते हैं.

निक्षेपागार प्रणाली के लाभ 

A निवेशकों को लाभ 

1 कोषों का जल्दी हस्तांतरण 

एकबार प्रतिभूतियां निवेशकों के खाते में क्रेडिट हो जाती हैं तो निवेशक उन प्रतिभूतियों का वैधानिक मालिक बन जाता है.

2 फिजिकल सर्टिफिकेट के सारे जोखिम खत्म

 फिजिकल रूप में स्टॉक के चोरी का जोखिम जलने का डर बना रहता है परंतु निक्षेपागार योजना में ऐसी कोई समस्या नहीं होती है. 

3 लेखों का विवरण 

विनियोगक निक्षेपागार सहभागी से समय-समय पर लेखे का विवरण प्राप्त करता है और हर महीने एनएसडीएल लेखे का विवरण विनियोगक को जांच करके भेजती है. 

4 दलाली में कमी कागजी काम कम होने के चलते दलाली में 0.25% की कमी आई है.

B जारीकर्ता को लाभ 

1 इसमें पंजीकरण लागत तथा अंश हस्तांतरण की लागत कम हो जाती है. 

2 इससे समय की बचत होती है 

3 इसमें विदेशी निवेशक को बिना खर्च किए आकर्षित किया जा सकता है.

C मध्यस्थों को लाभ 

1 जल्द निपटारा 

2 चोरी धोखाधड़ी के कम अवसर 

3 बुरी सुपुर्दगी का कम जोखिम

अभिगोपन

 अभिगोपन  वित्तीय  मध्यस्थों द्वारा प्रदान की जाने वाली सेवा है जिसमें बैंक, इंश्योरेंस कंपनी और निवेश गृह शामिल होते हैं. 

यह क्षति या वित्तीय हानि की स्थिति में क्षतिपूर्ति के भुगतान की गारंटी लेते हैं और इस प्रकार की गारंटी द्वारा वित्तीय जोखिम के दायित्व को स्वीकार करते हैं.
 वह व्यक्ति या संस्था जो अभीगोपन का कार्य करते हैं अभीगोपक कहलाते हैं. 

अभिगोपन निम्न परिस्थितियों में उत्पन्न होता है यथा इंश्योरेंस ,अंशों के पब्लिक निर्गमन में, बैंक द्वारा मुद्रा उधार देने पर.

अभिगोपन के दौरान अभीगोपक इस बात पर सहमत होता है कि वह प्राथमिक बाजार में जो प्रतिभूति  विक्रय के लिए उपलब्ध होंगी उसका एक न्यूनतम  भाग  क्रय करेगा.

अभिगोपन के संविदा के अंतर्गत अभिगोपक  एक निश्चित कमीशन भी प्राप्त करता है.
एक सार्वजनिक कंपनी को व्यापार करने का अधिकार उस समय तक प्राप्त नहीं हो सकता है जब तक कि कंपनी द्वारा निर्गमित अंशो के कम से कम 90% भाग पर जनता से आवेदन प्राप्त नहीं हो जाते, ऐसे निम्नतम राशि को न्यूनतम अभीदान कहते हैं.

ख्याति प्राप्त कंपनी की दशा में यह जोखिम होता है कि न्यूनतम अभिदान के बराबर राशि के लिए आवेदन प्राप्त होंगे या नहीं.नई कंपनी की दशा में  यह जोखिम और बढ़ जाता है. ऐसी दशा में इस बात की आवश्यकता होती है कि कोई व्यक्ति या संस्था इसकी जिम्मेदारी ले कि जनता द्वारा न्यूनतम अभिदान के बराबर अंशों के आवेदन न करने पर वह शेष अंशो  के लिए आवेदन करेगा.

 अंशो का अभिगोपन इसलिए भी आवश्यक है कि यदि एक कंपनी न्यूनतम अभिदान की राशि प्राप्त नहीं करेगी तो इसे व्यापार करने का प्रमाण पत्र प्राप्त नहीं होगा.

 भारतीय कंपनी अधिनियम 1956 के अनुसार अंशों की दशा में निर्गमन मूल्य पर 5% और ऋण पत्रों की दशा में निर्गमन मूल्य पर 2.5% अभिगोपन कमीशन निर्धारित है.
 अभिगोपन के स्वरूप 

1 फर्म अभिगोपन

 इसके अंतर्गत अंडरराइटर फर्म की प्रतिभूतियों को स्वयं एक निश्चित सीमा तक लेता है इन प्रतिभूतियों के आवेदन में ऐसी प्रतिभूतियां भी शामिल होती हैं जिन पर आवेदन नहीं किया गया .
इस अभिगोपन के अंतर्गत अभिगोपक निर्धारित संख्या तक प्रतिभूतियों का अभिगोपन करता है जहां इन पर आवेदन किया गया है या आवश्यकता से अधिक आवेदन प्राप्त हुआ है. यह अभिगोपन निवेशकों में विश्वास पैदा करता है 

2 आंशिक अभिगोपन 

इसके अंतर्गत पब्लिक इश्यू के एक भाग के अभिगोपन की गारंटी अभीगोपक द्वारा   दी जाती है जिसमें अभीगोपक  का दायित्व अनअभियाचित  भाग तक सीमित होता है.

3 उप अभिगोपन 

अभिगोपन के दौरान  अभिगोपक अपने जोखिम को कम करने के लिए जब अन्य अभिगोपकों से अनुबंध करता है तो वह अनुबंध उप अभिगोपन कहलाता है. इसमें प्रतिभूतियों को निर्गमित करने वाली कंपनी के साथ अभिगोपन का कोई ठहराव नहीं होता है.

4 संयुक्त अभिगोपन 

कंपनी जब नए इशु प्राथमिक बाजार में लाती है तो ज्यादा जोखिम को देखते हुए विभिन्न अभीगोपिक से अनुबंध करती है .प्रत्येक अभीगोपक का जोखिम उसके द्वारा लिए गए गारंटी तक सीमित होता है. यह अनुबंध संयुक्त अभिगोपन कहलाता है.

5 संघीय अभिगोपन 

इसमें विभिन्न अभिगोपन फर्मों द्वारा मिलकर अंशों या ऋण पत्रों के निर्गमन में जोखिम की गारंटी लेने के लिए आपस में अनुबंध किया जाता है. यह मिलकर आपस में सिंडिकेट अभिगोपन कहलाती हैं .
इसमें अभिगोपक  फर्मों द्वारा दो प्रकार का अनुबंध किया जाता है 
एक जो अभिगोपक फर्म निर्गमन करने वाली कंपनी के साथ करते हैं और दूसरा अभिगोपन फर्म दूसरे अभिगोपक फर्म के साथ करते हैं.

6 पूर्ण अभिगोपन 

इसमें अभिगोपक जनता द्वारा अभिदान ना किए जाने की दशा में जनता को प्रस्तावित संपूर्ण अंशु ऋण पत्रों को खरीदने की गारंटी देता है.

अभिगोपन की आवश्यकता 

पहले से विद्यमान कंपनी हो या नई कंपनी उन्हें पूंजी की आवश्यकता होती है पूंजी की भरपाई पूंजी बाजार द्वारा सरलता से प्राप्त करने के लिए अभिगोपन की आवश्यकता होती है .
अभिगोपन जनत को प्रतिभूतियों के क्रय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं जिसमें जोखिम कम होता है . 
अभीगोपन प्रतिभूतियों के निर्गमन द्वारा पूंजी प्राप्त करने का सबसे सुरक्षित तरीका है.




    
 


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merchant banking

13वीं शताब्दी में यूरोप में कुछ व्यापारिक परिवारों द्वारा वस्तुओं के क्रय विक्रय और प्रबंध से संबंधित कार्य किए जाते 
थे . इनके द्वारा बैंकिंग के कार्य भी किए जाते थे. यह राजाओं के बैंकर का कार्य भी करते थे और तटवर्ती क्षेत्रों में व्यापार के लिए वित्तीय सहायता भी देते थे .इस प्रकार 13वीं शताब्दी में  Merchant Bank उद्भव हुआ. 

मर्चेंट बैंकिंग

मर्चेंट बैंकिंग के अंतर्गत ऐसे संस्थाओं के कार्य आते हैं जो कर्पनियों के लिए प्रतिभूतियां लेते हैं ,विलय और अधिग्रहण से संबंधित कार्य करते हैं, अभिगोपन से संबंधित कार्य करते हैं, क्रेडिट कार्ड जारी करते हैं ,लघु स्तरीय उद्योगों के लिए धन की व्यवस्था करते हैं ,बीमा, वित्तीय परामर्श ,पोर्टफोलियो प्रबंधन ,जोखिम पूंजी से संबंधित कार्य करते हैं.

 Merchant Bank द्वारा दी जाने वाली सेवाएं


1 corporate  परामर्श 

 Merchant Bank कारपोरेट इकाइयों को समय-समय पर व्यापारिक कार्यों के लिए परामर्श देते हैं ताकि उनके कार्यों में सुधार होता रहे और निवेशकोंकीदृष्टिमेंकारपोरेट की छवि अच्छी बनी रहे जिससे इनके प्रतिभूतियों का बाजार मूल्य बढ़ सके.

2 प्रोजेक्ट से संबंधित सलाह देना

इसके अंतर्गत व्यवसाय के लिए संभावित प्रोजेक्ट और उसके कार्यान्वयन के लिए उठाए जाने वाले कदम पर परामर्श दिया जाता है जिसमें प्रोजेक्ट लागत का अनुमान, वित्तीय साधनों और विभिन्न प्रकार के प्रतिभूतियों की संरचना, प्रोजेक्ट के क्रियान्वयन के लिए वैधानिक पक्षों का गठन और सरकार द्वारा प्रोजेक्ट की सहमति से प्रदान करने से संबंधित कार्य किया जाता है.

3 कंपनी के विलय और हस्तांतरण का प्रबंध करना 

इसके अंतर्गत निगम में विलय और हस्तांतरण से संबंधित कार्यों का निष्पादन मर्चेंट बैंकों के द्वारा किया जाता है. दो या दो से अधिक कंपनियों के विलय के लिए या एक कंपनी द्वारा दूसरे कंपनी के अधिग्रहण के लिए इन बैंकों द्वारा आवश्यक सेवाएं दी जाती हैं जिसके बदले में  एक निश्चित फीस ली जाती हैं.

4 प्रतिभूतियों के निर्गमन का प्रबंधन करना 

प्रतिभूतियों के निर्गमन से संबंधित कार्यों में निम्न सेवाएं सम्मिलित की जाती हैं
 प्रोस्पेक्टर्स तैयार करना , निर्गमन की योजना बनाना और बजट तैयार करना ,ब्रोकरेज अभिगोपन से संबंधित समझौते करना, प्रतिभूतियों के निर्गमन के लिए विज्ञापन देना , स्टॉक एक्सचेंज में प्रतिभूतियों को सूचीबद्ध करने में सहायता करना ,बोनस इश्यू या नए इश्यू  के संबंध में सलाह देना .

5 कंपनी के पूंजी पुनर्गठन से संबंधित सेवाएं

इसके अंतर्गत निम्न प्रकार की सेवाएं आती हैं 
कंपनी के मेमोरेंडम ऑफ कंट्रोलर ऑफ़ कैपिटल इश्यू को तैयार करना और उसकी सहमति प्राप्त करने में सहायता करना .
बीमार इकाइयों के पूंजी संरचना का सुझाव देना .
फॉरेन एक्सचेंज रेगुलेशन एक्ट द्वारा संचालित कंपनियों को पूंजी निर्माण में सहायता प्रदान करना है.

6 लोन सिंडिकेशन का कार्य करना

 इसके अंतर्गत मर्चेंट बैंक ऋणदाता और वित्तीय संस्थाओं से वित्तीय सहायता के लिए ऋण आवेदनों से संबंधित पार्टी की सहायता करते हैं .इसके लिए आवश्यक वैधानिक दस्तावेजों  से संबंधित औपचारिकताओं की पूर्ति के लिए भी पार्टी की सहायता करते हैं. 

7.पोर्टफोलियो प्रबंधन  

इसके अंतर्गत मर्चेंट बैंक निवेशकों को निवेश निर्णय से संबंधित परामर्श देते हैं की विभिन्न प्रतिभूतियों में कितनी राशि का निवेश हो इसमें निवेश के उद्देश्य निवेश पर लगने वाले टैक्स और रिटर्न को ध्यान में रखा जाता है .

8 पट्टे की सेवाएं

 मर्चेंट बैंक पट्टे के लिए संपत्ति और वित्त की सुविधाएं प्रदान करते हैं पट्टा संपत्ति के स्वामी और प्रयोग करता के बीच के निश्चित समय अवधि के लिए समझौता होता है जिसमें संपत्ति का प्रयोग करता स्वामी को रेंट देता है 

9 तकनीकी और वित्तीय सहयोग 

तकनीकी और वित्तीय सहायता के रूप में यह निगमों को आवश्यकतानुसार तकनीकी में परिवर्तन करने हेतु विशेषज्ञों के रूप में सलाह देते हैं और इससे संबंधित संयंत्रों के लिए वित्तीय सहायता की व्यवस्था करते हैं.

10 म्युचुअल फंड को संचालित करना 

यह निवेशकों से प्राप्त कोषों को विभिन्न प्रकार के प्रतिभूतियों में इस प्रकार निवेश करते हैं जिससे जोखिम कम हो और निश्चित रिटर्न भी मिलता रहे . इसके लिए म्यूच्यूअल फंड का संचालन  किया जाता है.

मर्चेंट बैंकर के उत्तरदायित्व

1 प्रतिभूति बाजार के साथ जुड़ाव 

सेबी द्वारा मर्चेंट बैंकर को प्रतिभूति बाजार में व्यापार करने का प्रमाण पत्र दिए जाने पर प्रतिभूति बाजार के कार्यों के अलावा वह अन्य प्रकार के  प्रतिभूतियों के व्यापार कार्य नहीं कर सकता है.

2 लेखा पुस्तकों से संबंधित रिकॉर्ड तैयार करना 

इसके अंतर्गत मर्चेंट बैंकर लेखा लेखांकन से संबंधित रिकॉर्ड और दूसरे अन्य दस्तावेज तैयार करता है जिसमें बैलेंस शीट संबंधित अवधि का लाभ हानि खाता है इनके ऑडिट रिपोर्ट निर्गमन प्रबंध के प्री इशू और पोस्ट ईशु से संबंधित दस्तावेज और रिकॉर्ड सम्मिलित होते हैंजिसकी सूचना और तैयार करने का स्थान sebi को बताना पड़ता है.

3 छमाही परिणाम को प्रस्तुत करना 

मर्चेंट बैंकर के पूंजी की पर्याप्त मात्रा की जानकारी प्राप्ति हेतु सेबी इसके अर्धवार्षिक ऑन ऑडिटेड वित्तीय परिणामों की जांच कर सकता है और इस संदर्भ में मर्चेंट बैंकर को अनऑडिटेड फाइनेंशियल स्टेटमेंट को सेबी के समक्ष प्रस्तुत करना होता है.

4 लेखा पुस्तकों और उस पर आधारित रिकॉर्ड व अन्य दस्तावेजों को तैयार करना 

प्रत्येक मर्चेंट बैंकर के लिए यह आवश्यक होता है कि वह कम से कम 5 वर्षों के लेखांकन पुस्तकों के रिकॉर्ड व उसे संबंधित अन्य दस्तावेजों को तैयार रखें जिसकी जानकारी सेबी को होनी चाहिए.

5 ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार कदम उठाना 

मर्चेंट बैंकर द्वारा ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर दो महीने के अंदर ऐसा कदम उठाना चाहिए जिनसे कमियों या दोषों को दूर किया जा सके.

6 अंडरराइटिंग से संबंधित उत्तरदायित्व 

मर्चेंट बैंकर जिस निर्गमन का प्रबंध करता है उसका वह प्रमाण पत्र सेबी  द्वारा प्राप्त करता है. अभिगोपन से संबंधित धारणा के अंतर्गत वह कुल अभिगोपन जिसका उत्तरदायित्व उसके पास है या ₹2500000 में से जो भी कम हो उस राशि का 5% न्यूनतम अभिगोपन की राशि के रूप में स्वयं स्वीकार करता है. 

7 अन्य शेयरों के अधिग्रहण की मनाही 

कोई भी मर्चेंट बैंकर या उसका निदेशक पार्टनर या मुख्य अधिकारी अपने क्लाइंट के साथ उसकी प्रतिभूतियों में किसी प्रकार के सौदे में दाखिल नहीं होगा.

8 बोर्ड को जानकारी देना 

मर्चेंट बैंकर द्वारा किसी व्यापार में प्रविष्ट होने की जानकारी सेबी को 15 दिनों के अंदर दी जाती है उसके द्वारा प्रतिभूतियों के अधिग्रहण का विवरण भी सेबी के समक्ष प्रस्तुत किया जाना चाहिए.

9 अनुरोधक अधिकारी की नियुक्ति

 प्रत्येक मर्चेंट बैंकर का यह दायित्व होगा कि वह अपने यहां एक अनुरोध अधिकारी की नियुक्ति करें जो नियम कानून अधिग्रहण निर्देश आदेश जो सेबी द्वारा दिए जाते हैं उसकी पूर्ति के लिए उत्तरदाई होगा.

10 सेबी को निरीक्षण का अधिकार 

सेबी द्वारा विभिन्न उद्देश्यों की पूर्ति हेतु यदि किसी मर्चेंट बैंक का निरीक्षण करना हो तो वह एक या दो व्यक्तियों को निरीक्षण अधिकारी के रूप में नियुक्त कर सकता है ताकि मर्चेंट बैंकरों के लेखा पुस्तकों के रिकॉर्ड और दस्तावेजों से संबंधित पुस्तकों की जांच की जा सके.

11 अंकेक्षक की नियुक्ति 

निरीक्षण और जांच पड़ताल के लिए सेबी द्वारा योग्य अंकेक्षक को नियुक्त किया जा सकता है 

12 मर्चेंट बैंकर द्वारा कर्तव्य पालन नहीं करने की स्थिति में सेबी  उस पर कार्यवाही कर सकता है.



वित्तीय सेवाएं

वित्तीय सेवाएं वित्तीय प्रणाली के घटकों में से एक हैं जो विभिन्न क्रेडिट उपकरणों वित्तीय उत्पादों और सेवाओं के माध्यम से विभिन्न प्रकार के वित्त प्रदान करती हैं

 वित्तीय  सेवाओं के प्रकार

1कोष आधारित वित्तीय सेवाएं 
2फीस  आधारित वित्तीय सेवा 

1 fund based financial services 
 कोष आधारित वित्तीय 

Lease finance, hire purchase  and consumer credit,bill discounting, venture capital, housing finance, insurance services , factoring

2 fee based financial services 
 फीस आधारित वित्तीय सेवाएं

Portfolio management,  mergering and acquisitions, capital restructure, credit rating ,stock broker ,loan syndication.

Lease finance

इसके अंतर्गत पट्टा दाता द्वारा पट्टेदार को एक निश्चित अवधि के लिए संपत्ति का हस्तांतरण एक निश्चित किराए के बदले किया जाता है .संपत्ति का उपयोग पट्टेदार द्वारा ठीक उसी प्रकार किया जाता है जैसे उसकी यह व्यक्तिगत संपत्ति हो .संपत्ति के मरम्मत रखरखाव और होने वाले खर्च इसके अलावा उससे होने वाले अप्रत्याशित लाभ भी पट्टेदार के ही होते हैं. पट्टे की अवधि समाप्त होने पर पट्टादार संपत्ति को वापस कर सकता है या नया संविदा पट्टादाता के साथ पुनः कर सकता है.

Hire purchase 

किराया क्रय पद्धति के अंतर्गत स्वामी द्वारा संपत्तियों का हस्तांतरण एक निश्चित अवधि के लिए क्रेता को प्रयोग करने के लिए की जाती है. इस अवधि तक संपत्ति का क्रेता स्वामी को एक निश्चित किराए की राशि देता है. संपत्ति के मरम्मत और रखरखाव रखरखाव का खर्च भी संपत्ति के स्वामी द्वारा किया जाता है. किराए की अवधि समाप्त होने पर वह संपत्ति पुनः स्वामी को  क्रेता द्वारा  लौटा दी जाती है.

Bill discounting 

बिल डिस्काउंटिंग वित्तप्राप्ति के साधन है जिनके द्वारा बिना समपार्श्विक प्रतिभूतियों के उधार प्राप्त किया जा सकता है. बैंक बिल रिसिवेबल को बट्टे पर खरीद कर प्राप्ति की तिथि पर उसे प्रस्तुत करता है और बिल की वसूली करता है. बैंक द्वारा बिलों की बट्टे पर खरीदारी एक तरह से उनके द्वारा पार्टी को दिया जाने वाला उधार होता है.

Venture capital

किसी नए व्यवसाय को स्थापित करने के लिए या चालू व्यवसाय की नई इकाइयों की स्थापना के लिए पूंजी की आवश्यकता होती है जिसमें जोखिम तत्व सम्मिलित होता है. इस जोखिम को वहन करने वाली कोई कंपनी होती है या कोई फॉर्म या कोई व्यक्ति विशेष.  सामान्यत : इस्टार्टअप व्यवसाय के लिए एंजल इन्वेस्टर्स द्वारा पूंजी लगाई जाती है जो इन व्यवसाय मॉडल्स को अच्छे तरीके से अध्ययन करते हैं और लंबी अवधि के लिए लाभ की अपेक्षा से इस प्रकार के व्यवसाय में निवेश करते हैं.

Housing finance 

हाउसिंग फाइनेंस कंपनी द्वारा कोष आधारित सेवाओं में होम लोन की सुविधाएं लोगों को दी जाती है. इसमें उधार देने वाली कंपनी एक निश्चित इंटरेस्ट रेट पर ईएमआई के साथ उधार चुकाने का विकल्प देती है जिसमें नए घर की खरीद ,घर का निर्माण कार्य ,घर के मरम्मत या घर की अतिरिक्त संरचना को पूरा करने के लिए कंपनियां उधार देती हैं.

Portfolio management 
 
 यह वित्तीय बाजार में जोखिम और निवेश का मिलाजुला रूप होता है जिसके अंतर्गत निवेशक के फण्ड को बाजार प्रतिभूतियों में इस प्रकार निवेश किया जाता है कि जोखिम भी कम हो और निश्चित आय भी निवेशक को मिलती रहे. पोर्टफोलियो मैनेजमेंट का काम वित्तीय सेवा प्रदाता कंपनी द्वारा किया जाता है.
 
Credit Rating
 
क्रेडिट रेटिंग के अंतर्गत क्रेडिट रेटिंग एजेंसी किसी भी कंपनी के ऋण भुगतान क्षमता का निर्धारण करती हैं और उनकी श्रेणी का निर्धारण भी करती हैं.

विभिन्न प्रकार के संस्थाओं द्वारा जो क्रेडिट रेटिंग करवाया जाता है उनका मुख्य उद्देश्य वित्तीय कंपनियों से उन संस्थाओं को वित्त सहायता प्राप्त करना होता है जिसके अंतर्गत उधार लिए गए रकम के देने की क्षमता के निर्धारण को वित्त प्रदान करने वाली संस्थाएं देखती हैं और उसके अनुसार मौजूद संस्था को वित्तीय सहायता प्रदान करने का आश्वासन देती हैं.

Stock broker
 
stock broker भी कंपनी के  शेयर,  बांड या ऋण पत्रों  के अभिगोपन ,क्रय- विक्रय का कार्य करते हैं और यह कार्य फीस पर आधारित होता है.

Loan syndication 

Loan syndication  के अंतर्गत जब किसी व्यक्तिगत उधार कर्ता को लोनकी बड़ी राशि की आवश्यकता होती है तो उधार देने वाली संस्थाएं इस प्रकार की बड़ी रकम के लिए एक सिंडिकेट का गठन करती हैं जो कई ऋण दाता ओं का समूह होता है . इस सिंडिकेट द्वारा दिए गए उधार की राशि का जोखिम विभिन्न ऋणदाताओं में बंट जाता है .




 

उद्यमिता

  उद्यमिता  की परिभाषा उद्यमिता से आशय उद्यमी द्वारा किए जाने वाले  कार्यों  से है जिसमें उद्यमी किसी नए व्यवसाय को स्थापित करने से संबंधित ...